जो दिल बोलेगा वही लिखूँगा


मन करता है ,भविष्य को  लाँग लूँ
किस्मत को बना लूँ,खुद को बचा लूँ
जग में सबको दिखा दूँ,खुद को परख लूँ
ये धरती को चुम लूँ,यही जहान को मौन लूँ

कही ना छोडू़ँगा, कही ना लिखूँगा
कही ना बोलूँगा,कही ना सोचूँगा
कही ना देखूँगा,कही ना दिखूँगा
कही भी रहूँगा,जीवन वही सहूँगा

ये प्राण को लगा दूँगा,संघर्ष के पथ पर रख दूँगा
वही से कविता लिखूँगा,वही पर चाहत रख दूँगा
अंधेरे रहकर भौंर बनूँगा,माटी पर रहकर दूब बनूँगा
काँटे में रहकर फुल बनूँगा,कीचड़ में रहकर पद्म बनूंँगा

क्या?देखकर ,क्या? लिख दूँगा
जो दिल बोलेगा,वही लिख दूँगा
हर ख़्याल में अहसास लिखूँगा
अपनी कलम से भविष्य लिख दूँगा
दौलत ना,शौहरत लिखकर रख दूँगा
हर तरफ अंधेरा है,ज्योत लाकर रख दूँगा

रचयिता:रामअवध

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