किस्मत कहाँ? फूटेगी,भविष्य कहाँ? निकलेगी

*कविता*

अगर ढूँढ़ने निकले हो,तो ये रास्तें भी मिल जायेंगे ं
नींद को त्यागने निकलो हो,तो ये ख़्वाब भी जुड़ जायेंगे
लक्ष्य को पकड़ने निकलो हो,तो ये संघर्ष भी मिल जायेगे
खुशी लेने गये हो,तो ये संकट का बादल भी आ  जायेंगे

वक्त में वेदना हो,सफलता में वंदना हो
दिल में ख़्वाहिश हो,रात में त्यागिश हो
कवि में भाव हो,कविता में भी पावनी हो
जीवन साथी हो,उसी के पल में रात हो

जिसमें रूचि है ,वही जीवन की सूचि है
 जिसमें भाव है,वही जीवन की नाव है
जिसमें दाग है, वही जीवन की याग है
जिसमें राग है,वही जीवन की भाग है

विपत्ति जितनी भी है,सफलता उतना ही होगा
संघर्ष जितनी भी है,सफलता उतना ही मिलेगा

 रात में नींद ना आये
दिन में कभी चैन ना आये
वक्त में वक्त ना मिले
रक्त में रक्त ना मिले

ज़िंदगी सुखा सा लगे,जीवन भी बज्जर सा  लगे
ये धरती पाताल सा लगे,ये लोग वाचाल सा लगे

दिल में पत्थर की मार लेकर चला हूँ
दर्द की हमेशा लकीर लेकर चला हूँ
जीवन की परख लेकर चला हूँ
अतीत में वेदना भी लेकर चला हूँ

रात कहाँ ? कटेगी
ज़िंदगी कहाँ? गुजरेगी
भविष्य कहाँ?निकलेगी
किस्मत कहाँ ? फूटेगी

रचयिता:रामअवध


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