future

ये जहान को मौन देखता हूँ

*कविता*

खड़े होकर वक्त  को चलते देखा हूँ
चट्टान पर चढ़कर ये आसमान देखा हूँ
राहों में चढ़कर ,ये काँटे का दर्द देखा हूँ
अकेले रहकर ,ये जहान को बदलते देखा हूँ

कुछ पल है,जो बीत रहा है
जिंदगी का सुझाव बता रहा है
दिल की गहराई को सता रहा है
अंधेरा है,जो घटता जा रहा है

कुछ भावना है,जो मन को बाँधा है
कुछ अंधेरा है,जो ज़िंदगी को बाँधा है
 भविष्य भी अंधेरी है,ज़िंदगी भी डगेरी है
भाग्य दोहरता,किस्मत को बताता है

यहाँ हैवानियत की जड़ है
लोगों में कोई  डर नही है
देश में कोई बल नही है
व्यवस्था कोई ठीक नही है

प्रेम में छल  देखा
लोगों की हैवानियत देखा
शहर में तनाव को भी देखा
ये जहान पर हैवानियत भी देखा
बादल में चमकना देखा
लोगो को दुखी देखा

रचयिता:रामअवध






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