लक्ष्य को छोड़ा नही

*कविता*

बार-बार मुझे हाराया
बार-बार मुझे दोहराया
कई बार मुझे भागाया
कई बार मुझे डराया

अपनी व्यवस्था बना नही पाया
बेरोजगारी को मिटा नही पाया
पैसा कामना नही सिख पाया
कोशिश में जीत नही मिल पाया

यंत्रों पर रात-दिन हुआ
मैं चैन ओर बेचैन भी हुआ
मेहनत पर भी हार हुआ
मेरा मजाक पर भी मजाक हुआ

भाव में भी लिखा,ख़्वाब में भी लिखा
खुश होकर भी लिखा,दुख होकर भी लिखा
दुनियाँ देखकर भी लिखा,जिंदगी से सिखकर लिखा

कब?सोया,कब?जागा
कब? लिखा,कब?देखा
लक्ष्य को छोड़ा नही
हार को कभी पकड़ा नही

रचयिता:रामअवध


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