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माटी ने ऐसा इतिहास बताया

*कविता*

जहाँ पीपल के नीचे ज्ञान मिला
 जहाँ कवियों का कवि  मिला
शहनाई में शहनाईयों का धुन मिला
वेदों में वेद के ज्ञाता मिला
मंथन में चौदह रत्न मिला

महासंतो का सन्यास मिला
भक्तों मे विधाता दिखा
दानवीर में दानी मिला

यहाँ मानव में भगवान दिखा
मानव में ही दानव भी दिखा
आत्मा में परमात्मा  मिला
सही मार्ग पर सही राह दिखा
वीरों का वीर मिला
देश के लिए जान मिला

कला का इतिहास मिला
 वैज्ञानिक में ज्ञानी मिला
संत में कबीर दास मिले
पत्थर पर इतिहास मिले
वेदों का ज्ञान मिले

रामानंद के शिष्य मिले
राजा से महाराजा मिले
गंगोत्री से गंगा निकले
बनारस में हिन्दुस्तान मिले

देश में ऐसा इतिहास मिला
सभी राज्य में कण-कण पौराण मिला
ऐसा अतीत का इतिहास मिला

 रक्त से लटपत ये माटी कहती है
जीवन में ये छाती बताती है
इतिहास को लाकर दिखाती है
सोने  का डगेरा था,ये हिन्दुस्तानी बताती है
अपने ने अपनो को मरा ये देश बताती है

देश की सीमा लाँगकर आता था
देश मे षडयंत्र रचकर जाता था
रक्त के बहाव से बवंडर आता था
वीरों के डर से अजनबी भागता था
ऐसा इतिहास में देश नाम हुआ करता था

सदियों से गुलामी ने निचोड़ दिया
रक्त में कोई रक्त को छोड़ दिया
आज़ादी की लहर उठा दिये
वीरो में नही नयी जान बना दिये

गुलामी की जंजीर को तोड़ दिये
देश का उम्मीद को छोड़ दिये
वीरों रक्त ,ओर बलिदान दिये
उस समय का ऐसा इतिहास दिये

रचयिता:रामअवध

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