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मेरा ख़्वाब हो

*कविता*

बाँसुरी का धुन हो
स्नेह भरी रात हो
सरोवर में सफ़र हो
जल पर ही डगेरा हो
नाव पर ही बसेरा हो

पुष्प की कोमलता हो
 दर्पण में परछाँई हो
ख़्वाम भरी रात हो
जीवन उसके साथ हो

शीतल हवाओ का झोंका हो
मौसम का  मौका हो
अंगो-अंगो का मिलना हो
ह्रदय से ह्रदय का जुड़ना हो

विलीन वाली रात हो
प्रेम उसके साथ हो
जिंदगी में एक तमन्ना हो
चाँद पर भी मुस्कान हो

तारे जगमागहटे हो
चाँद भी शर्माता हो
प्यार भी महकता हो
परछाँई पर भी स्नेह हो

सोलह शृंगार की झलक हो
मोहिनी उसका रूप हो
नेत्र पर उसकी माया हो
प्यार उसका अदृश्य हो

रचयिता:रामअवध

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