शायरी


*शायरी*

अंधेरा हो या उजाला हो
तुम्हारी याद में ही सवेरा हो

  " रात्रि की याद में शायरी"
एक रात तेरी याद आयी
उसी ज़माने में तेरी बात आयी
वही हँसी में तेरी मुस्कान आयी
दिल पर तीर की वार आयी

         "प्रेम ओर प्रेमिका की शायरी"
एक पलक मे तेरी मुस्कान देखी थी
कही वह ना चली जाये, ऐसी ख्वाब देखी थी
हर तमन्ना में तेरा ज़िक्र भी किया  हूँ?
तेरी हर यादों में फ़िक्र भी किया हूँ
       
    "देश शक्ति,देश भक्ति ,शायरी"
मुल्क तुम्हारा भी है मुल्क हमारा भी है
किसी अजनबी का बेसहारा भी है
भारत देश हम सबका न्यारा भी है
यही माटी हम सबका प्यारा भी है

       "फकीर शायरी"
फकीर बन भी जाऊँगा तो क्या हुआ?
मैं नसीब भी बन जाऊँगा तो क्या हुआ?
हर वक्त छोड़कर आ जाऊँगा तो क्या हुआ?
कभी ना कभी प्यार भी तो हुआ होगा ?
हाथ जोड़कर सलाम भी कर लेते है
अपनी भी एक तमन्नाओं भी रख लेते है

रचयिता:रामअवध



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