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सभी के जीवन में क्या-क्या दिया होगा तुमने?
कुदरत को समझना पड़ेगा
जग की चादर में सोयेगें
अस्त हूँ,ग्रस्त हूँ
अविचल हूँ,मैं
करे तो करे क्या?
आनंद विहार में काफी संख्या लोग क्यों पहुँच रहे है ?
बंजर है ये क्षण
कोरोना ने विभाजन कर दिया,मानव का
चंचल दिल आज शांत है
कई अरबों लोगों को चीन ने संकट में डाल दिया
प्रलय ला दी वायरस
प्राकृतिक को मत गँवाना
चीन में फिर से फैला वायरस,कोरोना के बाद हंटा वायरस आया
कोरोना से मजाक नही,सरकार का सहयोग दे
मेहरिया  ख्वाबों की परछाई में आयी
दूर है मेरा घर
नर कोरोना से बच रहा है,जग कोरोना रणभूमि में लड़ रहा है
संवाददाता बना यंत्र
जिंदगी का रण
वैश्विक कोरोना वायरस पर रोकथाम
गुरु,माँ-बाप
दशरथ मांसी,पहाड़ी आदमी
नर कभी नारी का रुप लेना
कोरोना वायरस
पब्जी कविता
बनारस कवियों की पहचान
क्षण भर की याद
क्यों तोड़ दी ज़िंदगी?
होली में झूमना
रंगों की ओढ़नी छाया है
अम्बर का संदेशा
वंचक में संकट
शाम दिखा अम्बर में
कुछ करुँगा
मैं हूँ, या नही हूँ
हाथों की चिह्न गलत है
शांत  बैठा दिल,प्यार करने चला
हिंसा के पीछे दानव है
ज़माना दुखी से हारी है
दंगे क्यों? देश हम सबका है
यही पल को संभार लूँ
कौन? जीवन का तैराक है
क्या है? मन की रेखा
मैं चला जाता हूँ