Showing posts from January, 2020Show all

सही सोच सही इंसान देखा होगा

*कविता* चाँद की सुन्दरता,ये जहान देखता होगा अंधेरा का उजाला,ये इंसान देखता होगा रब की दुआ में,ये संसार झुकता होगा ईश्वर को पहचाने में,ये नर  चुकता होगा खुद की शक्ति,ये रब देता होगा कुदरत के आगे,ये तब देता होगा? साहस का तंत्र,ये रब  देता होगा शक्ति का मंत्र… Read more

रब भी आज भूल गया

*कविता* एक सफर शुरु हुई थी जो कभी खत्म नही हुई थी दिल में आज जख्म हुई थी उसके पल आत्मा में बसी हुई थी दिल आज भी रोया था वर्षों बाद भी सोया थी दर्द आज भी होया था साँस आज भी टूट गया था दिल हर जगह लुट गया सीने में आग सा लग गया किस्मत में दिल रुठ गया जिंद… Read more

हे माँ तुझे बुलाऊँगा

*कविता*हे माँ तुझे बुलाऊँगा हे माँ तुझे बुलाऊँगा साँसो में तुझे बसाऊँगा तेरी यादों में बिक जाऊँगा तेरे प्यार में लिख जाऊँगा जन्म लिया हूँ,तेरे अंगों से प्यार तुझे ही दिखाऊँगा इक़रार करा हूँ,तेरे दिल से यादों में तुझे ही बताऊँगा ऐसा लिखा हूँ,तेरे प्यार मे… Read more

दिल बोलता है ,मन ढोलता है

*कविता* मन को तड़पते देखा जीवन में रहते देखा दिल में रहते देखा आँसू को बहते देखा प्यार में रहते देखा जिंदगी को सिखाते देखा दुख-सुख में रहते देखा दूर चली गयी,प्रेम का सागर ले गयी दिल में बस गयी,उसी को ले गयी  प्रेम की सागर में लहर उठी तुफान की लहर में ज… Read more

मैं नसीब को बनाऊँगा

*कविता* चलो बाँध लो हाथों की लकीर बाँध दो मेरी किस्मत की लकीर मैं मिटा दूँगा हाथों की लकीर मैं लिख दूँगा कागज पर नसीब बाँध दूँगा किस्मत की लकीर छोडूँगा नही भाग्य पर नसीब छोड़ दूँगा मेहनत पर नसीब मेहनत की लकीर बन जाऊँगा,मैं ऐसा इतिहास बना जाऊँगा, मैं छ… Read more

देश आज भी आज़ाद नही है ,लोग आज भी बेईमान

*कविता* देश में आज भी बेईमान लोग है समाज आज भी अनजान लोग है देश में आज भी परेशान लोग है भ्रष्टाचार में आज भी महान लोग है भारत में आज भी नादान लोग है दुनिया आज भी शैतान लोग है इंसानियत में आज भी पहचान नही है दिल आज भी बेईमान नही है धरती आज भी बेजान नही प… Read more

सवेरा ये जागा है,वक्त ये भागा है

*कविता*सवेरा ये जागा है,वक्त ये भागा है चल उठ सवेरा ये जागा है चल दौड़ समय ये भागा है पकड़ लो ये नभ का धागा जकड़ लो ये वक़्त का रागा चल नींद खोल सूरज सर पर आया है चल जिद्द जोड़ ख़्वाब तुझ पर आया है कुदरत ने तुम्हें जागाया है संसार तुम्हें ही दिखाया है ये… Read more

खुद की रोशनी बनो,कही छिपों मत

*कविता* खुद का सूरज छिपा नही,जिन्दगी कही दिखा नही खुद में कही छिपा नही ,चुपचाप में कही रुका नही इंसानों में अब दिखा नही,परछाई में अब छिपा नही जिंदगी में कही रुका नही,लिखनें में कही चुका नही खुद की रोशनी दिखी नही,यादों में कही छिपी नही जीवन की प्यास बुझी नह… Read more

चलो-चलो कुदरत की ओर

*कविता* चलो जिंदगी की ऊँचाई देखने चलो ख्वाबों की चाहत देखने चलो यादों की बरसात देखने चलो कुदरत की पहचान देखने कही दूर ठहरने चले कुदरत के पल में रहने चले जीवन की सफर में रहने चले अनदेखी सी राहों बसने चले खुद को हौसले में डालने चले सूरज को छिपते देखने चले … Read more

प्रेम से ही प्रेम होता है

*कविता* प्रेम भी हमें  कुछ सिखाती है ज़िंदगी का रा़ज हमें बताती है स्वयं की दीवार हमें सताती है जीवन की राज़ हमें बताती है जीवन का शृंगार भी है प्रेम जिंदगी का इम्तिहान भी है प्रेम खुद में लाचार भी है  प्रेम खुद में पहचान भी है प्रेम दिल पर प्रहार भी है… Read more

गुंजता है,ये दिल

*कविता*गुंजता है,ये दिल गुंजता है,ये दिल  किसी के प्यार में धड़ता है,ये दिल किसी के इंतजार में बोलता है,ये दिन कविता के इकरार में झुकता है,ये पल उसी के ख़्वाब  में जोड़ता है,ये दिल उसी के यादों में सोता है,ये दिल उसी की बातों में जागता है,ये दिल उसी की रातो… Read more

वक्त भी कुछ सीखा कर जाती है

*कविता* ये वक्त सब कुछ लुटकर चला गया मुझे कुछ समझाकर निकल गया ये वक्त का दर्पण मुझे दिखा गया मुझे नये वक्त में छोड़कर चला गया लोगों ने मुझे धोका दिया वक्त ने मुझे मौका दिया लोगों ने मुझे रोक दिया मेहनत ने मुझे जोड़ दिया वक्त भी कुछ सीखाती है लोगों की पह… Read more

मीराबाई कृष्ण की राग बनी

*कविता* कृष्ण की बाँसुरी बनी हूँ मैं संग उसके साथ प्रीत लगाई हूँ मैं कन्हैया के स्वर में जीऊँगी मैं जीवन में उन्हीं की राग बनूँगी मैं प्रेम की गीत उन्हीं की गाती जा रही हूँ जीवन त्यागकर उन्हीं के हवाले जा रही हूँ खुद में ही कृष्ण की ख़्वाब देखती जा रही हूँ … Read more

जीवन को कहाँ ? बताते हैं लोग

*कविता* सच्चाई कहाँ? मिट जाती है अच्छाई कहाँ ? लुट जाती है आँखों से देखी भी झुठ जाती है किसी को सच बोलो तो रूठ जाती है सच्चाई को कहाँ ? छिपाकर  चले जाते है लोग अच्छाई को कहाँ? बताकर चले जाते है लोग संसार से दूर कहाँ? छिपकर चले जाते है लोग संसार को कुछ बताय… Read more

खुद में निराशा है,जीवन में छा गया

*कविता* जिन्दगी उलटी चली जा रही है वक्त भी रुकती चली जा रही है समय यूँही ढलती चली जा रही है जीवन यूँही घटती चली जा रही है हम यूँही चलते जा रहे है समय यूँही गुजारते जा रहे है जीवन को यूँही सड़ाते जा रहे है खुद में यूँही पछताते जा रहे है जीनव में निराशा पा… Read more

श्रावण में बाढ़ तो किसी ने लाया था?

*कविता* श्रावण को बादल ने घेरा था शीतल हवा ने हमें तो रोका था बूँदों की लहर हमें तो ठोंका था चमकते बादल ने हमें तो मोड़ा था बादलों का बोलना हमें तो सताया था एकदम चमककर हमें तो डराया था तेज हवा का झोंका हमें तो रुलाया था बैठे पेड़ों के पास हमें तो भीगाया था… Read more

मानव की छाप देखी है मैंने

*कविता* ज़िंदगी नही,खुशी खोजी है मैंने रातें नही,यादें खोजी है मैंने ख़ामोशी नही, ख़्वाब देखी है मैंने जिन्दगी नही,इम्तिहान देखी है मैंने वक्त नही,चक्र भी देखी है मैंने अपने जीवन की एक बात देखी है मैंने कही शाम होते हुए वही रात देखी है मैंने सबके जीवन में … Read more

रामअवध तेरा बचपन था

*कविता* बचपन की यादों में हमेशा साथ रहे थे दोस्ती की चाहत में हमेशा साथ गुजारे थे घर से कही दूर जाकर हमेशा साथ रहे थे जीवन की तकरीर में हमेशा साथ गुजारे थे दूर रहकर भी पास आने की बात करते थे हर पल की याद में दोस्ती फ़रियाद रखते थे ज़िंदगी के हर पल दोस्त के … Read more

गाय माता ,गाय देव जननी

*कविता* शहर-शहर में भुखी है हर जगह मैंने देखी है आँखों में पीड़ा दिखाती है गली-गली खाने जाती है जीवन वही तलाशती है घर में जाकर चिल्लाती है हर जगह मुँह दिखाती है नयनों से जल गीराती है गाय को ही सब भागती है पहले ज़माने के घरों रहती थी दुध उन्हीं को पीलात… Read more

गोमुख गंगा

*कविता* ऊँचे-नीचे लहर हूँ मैं,गंगा ही गंगा हूँ मैं गोमुख की धारा हूँ मैं,शिव की पहचान हूँ मैं स्वर्ग की माया हूँ मैं,ईश्वर की धारा हूँ मैं शिव की माया हूँ मैं, हर-हर गंगे का नारा हूँ मैं काशी-विश्वनाथ हूँ मैं, इलाहाबाद का संगम हूँ मैं आकाशगंगा से आयी हूँ मैं… Read more

धान की रोपाई थी,दिल में तन्हाई थी

*कविता* खेतों में धान की रोपाई थी दिल में बैठे यादों की तन्हाई थी पेड़ों के नीचे मेरी ही परछाई थी अकेला पल मुझे ही सताई थी खेतों में किसान की बुआई थी उसी में किसान की कमाई थी दिनों की मेहनत उसने सजाई थी मौसम में हरियाली उसने उगाई थी देश की जान उससे भी बचा… Read more

बचपन की नाव चली

*कविता* मेरी बचपन की नाव चली मेरी जीवन की बहाव चली मेरी ज़िंदगी की भाव चली मेरी यादों की तनाव चली वर्षों की लहर में कागज की नाव चली झुमते हुए बरसात में हमारे नंगे पाँव चली गाँव की गलियों में मेरी दंगे की हवा चली घर आकर माँ की हाथे से पीटाई की बातें चली … Read more

खुले पल में मुझे रहने दो

*कविता*खुले पल में मुझे रहने दों पंक्षी बनकर आज में उड़ना चाहता हूँ खुले मैदान में आज में जीना  चाहता हूँ कष्ट में आज खुलकर हँसना चाहता हूँ जीवन क्या?है,आज में समझना चाहता हूँ बाँध ना ले आज मुझे कोई,मैं जीना चाहता हूँ रोक ना ले आज मुझे कोई,मैं खोना चाहता हूँ… Read more

भयानक राह में भी भगदड़ है

*कविता* जीवन की भगदड़ ऐसी है,लोग रोने लग जाते है जब अंत समय आता है,लोग सोने लग जाते है अपने ही पद के अंहकार में डूबकर सो जाते है लम्बे वक्त के लिए खुद को छोड़कर रो जाते है ज़िंदगी यूँही रफ्तार से चली जा रही है वक्त की रफ्तार ठहरी नही जा रही है नेत्र की झलक … Read more

विचार ही विचार

*कविता* कविता लिखकर जो खुशी मिलती थी,वही खुशी मेरे जीवन में हमेशा के लिए उतर गयी,जब-तब में कविता लिख ना लूँ,जब-तब मुझे जीवन में खुशी नही मिलती थी ,पता नही मुझे क्या? होने लगा ,हर एक दिल की बात शब्दों में कहने की आदत हो गयी थी जिसके कारण मेरे जीवन में काफी परिवर… Read more

विकराल है,ये वक्त

*कविता* वक्त की रफ्तार है,कभी रुकती नही है इंसान के आगे है,कभी झुकती नही है काल वक्त का निचोड़ है,वक्त उसका घोल है भविष्य का जोड़ है,वक्त-वक्त में भी खोल है हर वक्त में सच्चाई है,जीवन में भी बुराई है लोगों में भी लड़ाई है,नाश मानव पर छाई है मानव-मानव पर पीड… Read more

चलकर-बनकर आ गयी

*कविता* अब ना खुश होने की हवा चली जीवन में बेकार की दवा चली युवाओं के साथ में टोली चली देश में भी टोली पर गोली चली पहेली में सहेली बनकर चली हर वक्त उसके साथ रहकर चली श्रावण में वर्षा ही लहर कर चली सुगंध में गुलशन की महक चली नयी चमक में नयी उम्मीद चली प… Read more

बेरोजगार में मदहोश हूँ

*कविता* बेरोजगार में मदहोश ही सही साहित्य-कला में होश तो सही जीवन में उस का रुचि तो सही हर वक्त उसका इंतजार तो सही दिल की बात दिल में सही लगा रोने ऐसी राह तो सही दिल में हलचल की राग तो सही सुकुन की यादें में बरसात तो सही बेरोजगारी में भी ख्वाहिश तो सही … Read more

मिथ्या में नही ,सत्य की प्रकाश में

*कविता* झूठ में झूठ ना मिलायेगें सच में छल ना मिलायेगें हार कभी ना  मान पायेगें तो हम कभी ना झुक पायेगें लड़-लड़ कर भी हारायेगें जीवन में चल-चलकर भी जायेगें मर के भी जीना सिखा जायेंगे घर से बेघर भी हो जायेगें सच वचन पर रह जायेगें इतिहास ऐसा लिख जायेगें … Read more

सच-सच है,झूठ-झूठ है

*कविता* सच-सच बोल कर ठके हैं,हम वास्त में लड़-लड़ कर हारे हैं,हम विश्वास नही,ठग-ठग पाये हैं,हम जग-जग में मर-मर के जी रहे है,हम सच को झूठ बनाना ये नर से सिखों गजब की भाषा गजब लोगों से सिखों गरीब की रेख गरीब लोगों से पुछो देश का बलिदान,शहीदों की आहूति से पुछ… Read more

भुमि का रक्षक हूँ मैं,मृत्युंजय हूँ मैं

*कविता* रुद्र की माला हूँ मैं,तीनो लोक का स्वामी हूँ मैं कंठ में विष का ज्वाला हूँ मैं,ये ब्रह्मांड का विधापति हूँ मैं निलधारी हूँ मैं ,अकाल मृत्यु चक्र दाता हूँ मैं जटाधारी हूँ मैं,ओर पवित्र गंगा की धारा हूँ मैं शिव हूँ मैं,अवतार हूँ मैं, शिवलिंग की माया हूँ … Read more

नया साल,ओर नया कविता

*कविता* आधी रात में कब?जाग गया हूँ समय के काल में कब? डूब गया हूँ अतीत की सोच में कब?लग गया हूँ ये ज़िंदगी में कब? बाँध गया हूँ बीते अतीत को मत बुलाया करो इन दिनों को भी याद कर लिया करो जीवन के भाग्य को भी बदल दिया करो ऐसा इतिहास लिखकर भेज दिया करो सोचा … Read more

18 साल पहले की नया साल

"नया साल" जब मैं छोटा था तब की बात है गाँव में नया साल आते ही,मैं अत्यंत अनुकूल होता जाता था क्योंकि वही जीवन का सुनहरा मौका था,उस दिन घर पर खाना नही खाते थे क्योंकि घर से कुछ पैसे लेकर पकवान बनाते थे,कोई नमक लेकर आ रहा है तो कोई मसाला तो कोई तेल,तो को… Read more