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18 साल पहले की नया साल

"नया साल"

जब मैं छोटा था तब की बात है
गाँव में नया साल आते ही,मैं अत्यंत अनुकूल होता जाता था क्योंकि वही जीवन का सुनहरा मौका था,उस दिन घर पर खाना नही खाते थे क्योंकि घर से कुछ पैसे लेकर पकवान बनाते थे,कोई नमक लेकर आ रहा है तो कोई मसाला
तो कोई तेल,तो कोई लकड़ी का प्रबंध कर रहा था,उन दिनों
खुले खेतों मे या बगीचों में भोजन का प्रबंध करते थे सभी साथ बैठकर नये साल का नया दिन मानते थे ,जो लोग उस ज़माने थे,वह नया साल आज भी नही भुल सकते है,
वे दिन भी क्या? दिन जो आज भी याद करता हूँ

 
"यंत्रों पर बधाई "

परन्तु आज यंत्रों द्वारा नये वर्ष का बधाई दी जाती है
जिसमें मुझे थोड़ा सा भी खुशी के पल नही दिखते है, साल नया, पर कुछ लोगों लक्षण वही है पहले बुरे लक्षण को त्यागों फिर नया साल मनाओ, एक नयी उम्मीद लेकर, नये वर्ष की शुरुआत करो,

बड़े होते घर की समस्या फँस गये

हर वर्ष ,नये वर्ष का शुरुआत होती परन्तु किसी भी प्रकार का मन हलचल उत्पन्न नही होता है ,जो बचपन में होता था, उन दिनों में पैसे की कमी हमेशा सताती है लेकिन खुशियाँ हर जगह ढूँढ ही लेते थे, जिसमे मन का विकास तथा शारीरिक का भी मनोरंजन होता ,सहपाठियों का एक समूह होता था
प्रत्येक लोग हर सहपाठियों से भावपूर्वक भिन्न थे ,एक दुसरे से अच्छी तरह परिचित थे, जैसे -जैसे बड़ा होते गये, वैसे-वैसे घर की समस्या में फँसते गये ,आज वह पल ढूँढने से भी नही मिलता

रचयिता:रामअवध

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