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नया साल,ओर नया कविता

*कविता*

आधी रात में कब?जाग गया हूँ
समय के काल में कब? डूब गया हूँ
अतीत की सोच में कब?लग गया हूँ
ये ज़िंदगी में कब? बाँध गया हूँ

बीते अतीत को मत बुलाया करो
इन दिनों को भी याद कर लिया करो
जीवन के भाग्य को भी बदल दिया करो
ऐसा इतिहास लिखकर भेज दिया करो

सोचा उस वक्त लिखकर नया साल मानना लूँ
आज की जिंदगी उसी पल के नाम कर लूँ
सोचकर बचपन की यादें में नया साल मानना लूँ
उस वक्त की अतीत को मन एक बार दोहरा लूँ

सच बोलूँ मुझे तो कुछ नया नही लग रहा है
जीवन के वक्त में वही रात,वही शाम लग रहा है

कभी सोचता हूँ,ज़िंदगी नया मोड़ तो लायेगी
दिल बोलता है,वक्त को भी तोड़कर लायेगी
जीवन का नया इतिहास बनकर आयेगी
नया साल में,नया लहर की तिरंगे लायेगी

कभी ना कभी ख़्वाब तो सच होगा
उस दिन उसी पर पहचान तो होगा
यादों में मेरा ,संघर्ष की अतीत होगा
उस वक्त मेरा पहचान,मेरा ही लहर होगा

नयनें भी पलक- झपक रही है
नींद में भी निद्रा आ रही है

रचयिता:रामअवध


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