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रामअवध तेरा बचपन था

*कविता*

बचपन की यादों में हमेशा साथ रहे थे
दोस्ती की चाहत में हमेशा साथ गुजारे थे
घर से कही दूर जाकर हमेशा साथ रहे थे
जीवन की तकरीर में हमेशा साथ गुजारे थे

दूर रहकर भी पास आने की बात करते थे
हर पल की याद में दोस्ती फ़रियाद रखते थे
ज़िंदगी के हर पल दोस्त के नाम रखते थे
हर खेल-खेलने के लिए इम्तिहान रखते थे
सही ज़िंदगी,उसी के पल नाम रखते थे

दोस्ती बचपन के पल में सही रहती थी
ज़िंदगी भी यादों अतीत रहकर रहती थी
उसी ज़माने में ही खुशी बार-बार आती थी
जीवन की पुकार वही से लहरकर आती थी

खुले आसमान में वही से समाकर बिखर जाती थी
ज़िदगी में हमेशा याद करके अतीत को भुला जाती थी
खुलें हवाओं में आहट की लहर भी डराकर चली जाती थी
दोस्ती हमेशा वही से लहराकर गुजर जाती थी

 आज-कल दोस्ती काम पर रह गयी
दुनिया उसी के नाम पर चलकर रह गयी
भविष्य के समय यंत्रों पर दिल जायेगी
मुलाक़ात भी वही,पल भी वही गुजर जायेगी
बिना दिखे वह पल भी यंत्रों पर रहकर जायेगी

रचयिता:रामअवध


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