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श्रावण में बाढ़ तो किसी ने लाया था?

*कविता*

श्रावण को बादल ने घेरा था
शीतल हवा ने हमें तो रोका था
बूँदों की लहर हमें तो ठोंका था
चमकते बादल ने हमें तो मोड़ा था

बादलों का बोलना हमें तो सताया था
एकदम चमककर हमें तो डराया था
तेज हवा का झोंका हमें तो रुलाया था
बैठे पेड़ों के पास हमें तो भीगाया था
बूँदों की तेज बहाव तुफान तो लाया था
हर जगह-जगह में पानी तो घुसाया था

कुटिया सबका उससे तो उजाड़ा था
हर घर-घर में पानी उसने तो गुसाया था
किसान की फसल उसने तो डूबाया था
किसान का अनाज उसने तो बहाया था
वर्षों का सपना भी उसने तो डूबाया था
ज़िंदगी सबकी उसने तो उजाड़ा था

सही लोगों को भी कूदरत ने सताया था
पानी में जानवर को भी बहाया था
मर-मर गये लोग उसी ने तैराया था
घर-घर में आँसू उसी ने बहाया था
घर से जींव-जन्तु को उसी ने उठाया था
सब घर को भी उसी ने डूबाया था

रचयिता:रामअवध



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