future

भुमि का रक्षक हूँ मैं,मृत्युंजय हूँ मैं

*कविता*

रुद्र की माला हूँ मैं,तीनो लोक का स्वामी हूँ मैं
कंठ में विष का ज्वाला हूँ मैं,ये ब्रह्मांड का विधापति हूँ मैं
निलधारी हूँ मैं ,अकाल मृत्यु चक्र दाता हूँ मैं
जटाधारी हूँ मैं,ओर पवित्र गंगा की धारा हूँ मैं
शिव हूँ मैं,अवतार हूँ मैं, शिवलिंग की माया हूँ मैं
शक्ति का ब्रह्मांड हूँ मैं, जन्मदाता का ज्ञान हूँ मैं

अदृश्य सा बादल हूँ मैं, यही ब्रह्मांड में बसता हूँ मैं
फण शेषनाग का माला हूँ मैं,भविष्य वर्तमान की रेखा हूँ मैं
वक्त से तेज रफ्तार हूँ मैं,सभी में आत्मा हूँ मैं
बायें हाथ का खेल ये,नक्षत्रों धरती वास में हूँ मैं
देव भुमि का रक्षक हूँ मैं,दानव पर संकट हूँ मैं

आकाश हूँ मैं,ब्राह्म हूँ मैं,मैं ही विधाता हूँ मैं
दूध काशी हूँ मै,वही जल में वास हूँ मैं
तपस्या का जन्म दाता हूँ मै,विधाता में विधाता हूँ मैं
खुद का भक्त हूँ मै,उसी में मुक्त हूँ मै,ईश्वर हूँ मैं
खुले गंगा का जटा हूँ मैं कण-कण जटि हूँ मैं

नयनों का स्वामी हूँ मै,शिव का अवतार हूँ मैं
गुरू-का गुरु हूँ मै,स्वयं का तपस्वी हूँ मै
नींद की धारा हूँ मैं,यही ब्रह्मांड की लहर हूँ मैं
मैं ही कैलाश हूँ, मैं ही हिमगिरि-जगरनाथ हूँ मैं

रचयिता:रामअवध


Post a Comment

0 Comments