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गुंजता है,ये दिल

*कविता*

गुंजता है, ये दिल  किसी के प्यार में
धड़ता है, ये दिल उसी की याद में
बोलता है,ये दिल कविता का प्यार में
झुकता है, ये दिल उसी के ख़्वाब  में
जोड़ता है,ये दिल उसी के यादों में
सोता है, ये दिल ख़्वाहिश की रातों में
जागता है,ये दिल रातों की प्यार में

नयी उम्मीद,नयी जान बन जाओ तुम
नयी उम्दा,नयी शान बन जाओ तुम
नयी सोच,नयी पहचान बना दो तुम
नयी सुबह,नयी जान बन जाओ तुम
हमारे ख्यालों की रानी बन जाओ तुम

मेरी जान की ज्योत बन जाओ तुम
मेरी जिंदगी की उम्मीदवार बन जाओ तुम
मेरी ख्वाहिश की लाज रख लो तुम
मेरी जिदंगी में ये बात रख लो तुम

धोखा नही,मौका देकर रखूँगा तुम्हें
ख़्वाबों नही,ख्वाहिश में रखूँगा तुम्हें
पल में नही,दिल बसाकर रखूँगा तुम्हें
दुख नही,सुख देकर रखूँगा तुम्हें

रचयिता:रामअवध


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