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विचार ही विचार

*कविता*

कविता लिखकर जो खुशी मिलती थी,वही खुशी मेरे जीवन में हमेशा के लिए उतर गयी,जब-तब में कविता लिख ना लूँ,जब-तब मुझे जीवन में खुशी नही मिलती थी ,पता नही मुझे क्या? होने लगा ,हर एक दिल की बात शब्दों में कहने की आदत हो गयी थी जिसके कारण मेरे जीवन में काफी परिवर्तन आ गया 
उसी समय से जीवन की गहराइयों में जाने लगा,तरह-तरह के ख़्वाब बनकर आने लगा मुझे भी अत्यंत आनंद की अनुभूति होने लगा,

कवि को कविता से प्रेम का होने लगा

सच में,कवि को कविता से प्रेम होता है, क्योंकि कविता ऐसे नही लिखी जाती उसमें भी पवित्र प्रेम का गुण माना जाता है
जो कवि होता है,वह उसी के पल में आंतरिक-भाव में खुद को वैसा ही अहसास करता है जैसा कि किसी आदमी पर पीड़ा या स्नेह आ गयी हो, कवि जो नेत्र से देखता है तथा उसकी कल्पना करता है उसी की कल्पना में खो जाता है ओर उसे शब्दों के माध्यम से अपने दिल में उतार कर ,कविता बना देता है प्रत्येक जीवन की प्रकिया को शब्दों में उतार कर भविष्य 
वह पल को महसूस किया जा सके, इसलिए कविता लिखकर रखा जाता है ताकि वह खुशी के पल याद किया जा सके ,

कविता-कवि को अच्छे दिल का विचार माना जाता है

ज़िदगी बहुत कुछ लोगों को सिखाती है कुछ है जो अपने-आप को परख लेते है तो कुछ जो मदहोश बनकर जीवन को यापन में लगा देते जिसके कारण उन्हें जीवन के अंत समय में काफी संकट का सामना करना पड़ा तथा उन्हें समाज में अच्छा नही लगता है, इसलिए प्रत्येक मनुष्य को कुछ ना कुछ लिखना जरुरी है क्योंकि अपने अतीत को याद किया जा सके ,

अपने विचार कही ना कही लोगों तक जरूर बताये क्योंकि विचार से ही इंसान की परख होती है तथा जीवन में उसे आगे बढ़ने का सहयोग देती है, जीवन काफी रफ्तार से चल रही है 

दिन प्रति लोगों में परिवर्तन का भाव उत्पन्न हो रहा है जिसके कारण अंहकार का भी भाव भी आ रहा है आप लोगों से अनुरोध है कि जीवन में बाँधकर ना जीये जीवन है तो खुल का जीये क्योंकि हर इंसान जीवन को खुलकर नही जी पाता है

विचार रखोगे ं 

परछाई कि तरह बनो
जो छिप जाती है
साथ नही छोड़ती है
वक्त आने दिख भी जाती है

रचयिता:रामअवध


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