future

चलो-चलो कुदरत की ओर

*कविता*

चलो जिंदगी की ऊँचाई देखने
चलो ख्वाबों की चाहत देखने
चलो यादों की बरसात देखने
चलो कुदरत की पहचान देखने

कही दूर ठहरने चले
कुदरत के पल रहने चले
जीवन की सफर में रहने चले
अनदेखी सी राहों बसने चले
खुद को हौसले में डालने चले
सूरज को छिपते देखने चले

रात वही गुजारने चले
सवेरा वही देखने चले

चलो ऊँचाई की नाप देखने
चलो जिंदगी की ताज देखने
चलो जीवन की राह देखने
चलो आज अतीत को देखने
चलो आज भूले यादों को देखने

पोखरे  में मेंढक की छलाँग देखे
वही जीवों  की कतार देखे
वही कुदरत की जहान देखे
आनंद जिंदगी की प्रहार देखे
जिंदगी की वही  उड़ान देखे

जिन्दगी की बरसात देखी
वही जीवन की तलाश देखी
ख्वाबों की जहान देखी
नींद भरी रात देखी
वही सुन्दर जहान भरी देखी
वही दिल भरी रात देखी
वही दिल की चाहत देखी

"शहर में आने के बाद"
तड़प रही थी जिन्दगी
नरक रही थी जिन्दगी
सोच रही थी जिन्दगी
बेचैन रही थी जिन्दगी

रचयिता:रामअवध




Post a Comment

0 Comments