सवेरा ये जागा है,वक्त ये भागा है

*कविता*सवेरा ये जागा है,वक्त ये भागा है

चल उठ सवेरा ये जागा है
चल दौड़ समय ये भागा है
पकड़ लो ये नभ का धागा
जकड़ लो ये वक़्त का रागा

चल नींद खोल सूरज सर पर आया है
चल जिद्द जोड़ ख़्वाब तुझ पर आया है

कुदरत ने तुम्हें जागाया है
संसार तुम्हें ही दिखाया है
ये वक्त ने तुम्हें उठाया है
भविष्य तुम्हें ही बताया है

कल की  सोच में ना डूबों तुम
निराशा के आगे ना झुकों तुम
ख्वाबों को कभी ना भूलो तुम
जिंदगी के आगे ना रुको तुम

आगे भी सवेरा तुम्हें उठायेगा
पीछे की काल से तुम्हें भागायेगा
भाग्य की डगर तुम्हें दिखायेगा
ईश्वर की प्रार्थना तुम्हें बतायेगा

छोड़ दो तुम,दागने की दुनिया
मोड़ दो तुम,भागने की दुनिया
जोड़ दो तुम,कुदरत की दुनिया
छोड़ दो तुम,आरामों की दुनिया

छोड़ दो तुम शर्म की दुनिया
तोड़ दो तुम धर्म की दुनिया

रचयिता:रामअवध




0 Comments