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सवेरा ये जागा,वक्त ये भागा


*कविता*

चल उठ सवेरा ये भागा है
चल दौड़ समय ये जागा है
पकड़ लो ये नभ का धागा
जकड़ लो ये वक़्त का रागा

चल नींद खोल सूरज सर पर आया है
चल जिद्द जोड़ ख़्वाब तुझे दिखाया है
कुदरत ने तुम्हें जागाया है संसार तुम्हें दिखाया है
ये वक्त ने तुम्हें उठाया है भविष्य  तुम्हें बताया है

कल की  सोच में ना डूबों तुम
निराशा के आगे ना झुकों तुम
ख्वाबों को कभी ना भुलो तुम
जिंदगी के आगे ना रुको तुम

छोड़ दो तुम दागने की दुनिया
छोड़ दो तुम भागने की दुनिया
छोड़ दो तुम आरामों की दुनिया
छोड़ दो तुम हरामों की दुनिया
छोड़ दो तुम शर्म की दुनिया
छोड़ दो तुम धर्म की दुनिया


रचयिता:रामअवध




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