मैं नसीब को बनाऊँगा

*कविता*

चलो बाँध लो हाथों की लकीर
बाँध दो मेरी किस्मत की लकीर

मैं मिटा दूँगा हाथों की लकीर
मैं लिख दूँगा कागज पर नसीब
बाँध दूँगा किस्मत की लकीर
छोडूँगा नही भाग्य पर नसीब
छोड़ दूँगा मेहनत पर नसीब

मेहनत की लकीर बन जाऊँगा,मैं
ऐसा इतिहास बना जाऊँगा, मैं
छोड़ दूँगा हाथों की लकीरों को
मोड़ दूँगा किस्मत की लकीर को

सह लूँगा वक्त की मार को
डस लूँगा इतिहास के पन्नों को
बाँध दूँगा हाथों की फ़कीरों को
समझ लूँगा मेहनत की लकीरों को

डरो मत किस्मत से
डराओ मत ईश्वर से
लड़ो मत ईश्वर से
लड़ों तो किस्मत से

भाग्य को हम मोडे़गे
माध्यम हम बनायेगें
इतिहास हम लिख जायेंगे
माँ का सपना लिख जायेंगे
माँ का चरण बन जायेंगे

समय आने पर सबको दिखायेगें
जिंदगी अपनी  हम बतायेगें
कभी प्रेरणा हम बन जायेंगे
आगे की सोच हम बन जायेंगे

संसार को हम दिखायेगे
दुनिया हमे जान पायेगे ं
ऐसा बनकर हम दिखायेगे
सबके दिल हम बस जायेंगे


रचयिता:रामअवध


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