रब भी आज भूल गया

*कविता*

एक सफर शुरु हुई थी
जो कभी खत्म नही हुई थी
दिल में आज जख्म हुई थी
उसके पल आत्मा में बसी हुई थी

दिल आज भी रोया था
वर्षों बाद भी सोया थी
दर्द आज भी होया था
साँस आज भी टूट गया था

दिल हर जगह लुट गया
सीने में आग सा लग गया
किस्मत में दिल रुठ गया
जिंदगी में आज सब रुठ गया

वक्त में भी आज रुठ गया
जिंदगी में भी आज टूट गया
जीवन में भी आज रूस गया
दूसरो की बातों में भी टूट गया
रब भी आज भुल गया

जिंदगी में आज समाप्त हो गये
सपने में आज बिखर गये

रचयिता:रामअवध

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