प्रेम से ही प्रेम होता है

*कविता*

प्रेम भी हमें  कुछ सिखाती है
ज़िंदगी का रा़ज हमें बताती है
स्वयं की दीवार हमें सताती है
जीवन की राज़ हमें बताती है

जीवन का शृंगार भी है प्रेम
जिंदगी का इम्तिहान भी है प्रेम
खुद में लाचार भी है  प्रेम
खुद में पहचान भी है प्रेम
दिल पर प्रहार भी है प्रेम
जिंदगी में सुधार भी है प्रेम
मोहित कर दे, यह भी है प्रेम

प्रेम की भाषा हमें बताती है
जिंदगी की सुधार हमें सिखाती है
खुशी की जिंदगी हमें जीआती है
प्रेम ना होने पर हमें बहुत सताती है
अकेली जिंदगी में बहुत रुलाती है

खुशियों को उछालकर दिखाती है
दिल को बहका कर दिखाती है
दिल को महका कर दिखाती है
मन को हरण करके दिखाती  है

रचयिता:रामअवध

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