मिथ्या में नही ,सत्य की प्रकाश में

*कविता*

झूठ में झूठ ना मिलायेगें
सच में छल ना मिलायेगें
हार कभी ना  मान पायेगें
तो हम कभी ना झुक पायेगें

लड़-लड़ कर भी हारायेगें
जीवन में चल-चलकर भी जायेगें
मर के भी जीना सिखा जायेंगे

घर से बेघर भी हो जायेगें
सच वचन पर रह जायेगें
इतिहास ऐसा लिख जायेगें
जग में मर के भी याद रह जायेगें

संसार हमें भुला ना पायेगें
धूल बनकर भी उड़ जायेगें
यही धरती में  मिल जायेगें
जग छोड़कर भी मर ना पायेगें
यही भू में ख़्वाब बनकर रह जायेगें

चिंगारी में आग बनकर आ जायेंगे
खुद की ज्योत बनकर जल जायेगें
माटी पर प्यार की बात लिख जायेगें
ऐसा इतिहास लिखकर निकल जायेगें

इतिहास में हमें पुकारा जायेगा
समय हमें भी लौटाया जायेगा
वही पर शौहरत हमें मिल पायेगा
संसार में हमें ,जागाया जायेगा

रचयिता:रामअवध

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