बेरोजगार में मदहोश हूँ

*कविता*

बेरोजगार में मदहोश ही सही
साहित्य-कला में होश तो सही
जीवन में उस का रुचि तो सही
हर वक्त उसका इंतजार तो सही

दिल की बात दिल में सही
लगा रोने ऐसी राह तो सही
दिल में हलचल की राग तो सही
सुकुन की यादें में बरसात तो सही

बेरोजगारी में भी ख्वाहिश तो सही
हर वक्त में शहनाई की राह तो सही
कविता ना होनें पर,उसकी चाह तो सही
उसके ना आने पर,दिल बेहाल तो सही

बचपन का पल स्वर्ण से भी सही
उन-दिनों का लम्बा सफ़र तो सही
यादों में बचपन की बसर तो सही
हर वक्त अतीत की यादें तो सही

रचयिता:रामअवध

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