future

चलकर-बनकर आ गयी

*कविता*

अब ना खुश होने की हवा चली
जीवन में बेकार की दवा चली
युवाओं के साथ में टोली चली
देश में भी टोली पर गोली चली

पहेली में सहेली बनकर चली
हर वक्त उसके साथ रहकर चली
श्रावण में वर्षा ही लहर कर चली
सुगंध में गुलशन की महक चली
नयी चमक में नयी उम्मीद चली

पाँव में काँटे की लकीर बनी
वही चिरकर एक छाँव बनी
दर्द की एक अहसास बनी
रक्त में बहाव की दलाल बनी

दिल में दर्द ना होने की दवा आयी
रहने के लिए हवा की झोंका आयी
कुदरती स्वभाव की परिभाषा आयी
स्वच्छ हवा बनकर एक दवा आयी
मेरे सीने में साँसे की ठहर आयी

वही से मेरे जीवन की शुरुआत आयी
नयी सड़क नही राह बनकर आयी
जीवन मे कविता की शुरुआत हुयी
उसी के नाम पर प्रेम की बात आयी
वही से कवि का ख़्वाब बनकर आयी

रचयिता:रामअवध


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