विकराल है,ये वक्त

*कविता*

वक्त की रफ्तार है,कभी रुकती नही है
इंसान के आगे है,कभी झुकती नही है
काल वक्त का निचोड़ है,वक्त उसका घोल है
भविष्य का जोड़ है,वक्त-वक्त में भी खोल है

हर वक्त में सच्चाई है,जीवन में भी बुराई है
लोगों में भी लड़ाई है,नाश मानव पर छाई है
मानव-मानव पर पीड़ा है,कण-कण में कीड़ा है
खेत में भी हीरा है, कृष्ण के दिल में भी मीरा है

लगे अंधेरे की ऊँचाई देखने
लगे उजाले की किरण देखने
लगे मुड़कर आकाश देखने
लगे हवाओं का अहसास देखने

अंधेरे की ऊँचाई, अंधेरे में दिखाई दी
उजाले की परछाई,अंधेरे को जागा दी
किस्मत की लकीरें,दर्पण में भी छिपा दी
भविष्य की अंधेरी घटा को भी भागा दी

सावन की घटा,बरसात बनकर आयेगा
दिल का प्यार, अमानत बनकर आयेगा
बाँधी जीवन में,जमानत बनकर आयेगा
आकाश में,प्रेम की रात बनकर आयेगा
उसी का प्यार में हवा बनकर चला जाऊँगा

रचयिता:रामअवध

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