भयानक राह में भी भगदड़ है

*कविता*

जीवन की भगदड़ ऐसी है,लोग रोने लग जाते है
जब अंत समय आता है,लोग सोने लग जाते है
अपने ही पद के अंहकार में डूबकर सो जाते है
लम्बे वक्त के लिए खुद को छोड़कर रो जाते है

ज़िंदगी यूँही रफ्तार से चली जा रही है
वक्त की रफ्तार ठहरी नही जा रही है
नेत्र की झलक से बवंडर दिखी जा रही है
संसार घुम रही है,इंसान कहाँ? उड़ी जा रही है

तेज रफ्तार से ये जिन्दगी भी बिक रही है
ना जाने कहाँ?ये जिंदगी भी झुकी जा रही है
ना जाने कहाँ?ये भविष्य भी मुड़ी जा रही है
तेज रफ्तार से ये जीवन भी नरक बनी जा रही है

संघर्ष इसकी अमानत है,त्याग इसकी जमानत है
चक्र इसका भयानक है, कही ना रुके ये जन्नत है
कही ना ठहरे ये वक्त है,ये चक्र भी का कुदरत  है,
उक्त में अतीत ठहरा है,रक्त में भी भक्त ठहरा है

भाग रहे है,ये जहान के लोग
नाच रहे है,ये कुदरत के रोग
रुक रही है,ये मेरी जिंदगी
झूक रही है,ये मेरी जिंदगी

रचयिता:रामअवध

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