Showing posts from February, 2020Show all

दंगे क्यों? देश हम सबका है

*कविता* दंगे क्यों? दंगे की भीड़ में बेकसूर मारे गये पत्थरों से उनका रक्त बहाये गये लहू में बेकसूर बेचारे चिल्लाये गये उन पर पत्थर बाज़ करवाये गये हिंसा को रोकेगें,देश को बचायेगें देश अपना है,अपनों को बुलायेगें रुधिर को हटायेगें,देश को जागायेगें स्वयं को… Read more

यही पल को संभार लूँ

*कविता* संसार से दूर संभार के नूर यही पल में जी जाऊँ यही पल में मर जाऊँ यही पल में रह जाऊँ यही पल में ढल जाऊँ कल की रात थी,अंधेरे की श्रावण थी पल की बात थी,उजाले की शरण थी शान की रात थी,उजारने की नरण थी दान की बात थी,ज़माने की सारण थी गज़ब की चाहत है … Read more

कौन? जीवन का तैराक है

*कविता* तैरने चला हूँ,जिंदगी के समुन्दर से लड़ने चला हूँ,जिंदगी के जंजीर से तौलने चला हूँ,समय के दायरे से छोड़ने चला हूँ,किस्मत के कायरे से जिंदगी की गहराई कोई नाप नही पाता हर कोई गहराई की बात जान नही पाता जिंदगी अनमोल है हर कोई समझ नही पाता बचने के लिए को… Read more

क्या है? मन की रेखा

*कविता* सच की रेखा कभी नही दिखती है मनुज के आगे कभी नही झुकती है वक्त के सामने कभी नही रुकती है सच्चाई की बात कभी नही दिखती है मनुष्य ढूँढता है ,सच्चाई की बात संसार सोचा है ,अच्छाई की रात कुदरत बोलता है ,ईश्वर की आदत लोग समझते है ,कुदरत की लागत सही समझते … Read more

मैं चला जाता हूँ

*कविता* मैं चला जाता हूँ मैं आज भी अतीत में चला जाता हूँ वही की यादों में ठहर कर रह जाता हूँ रोज सुबह सूरज के चरणों झुक जाता हूँ मैं आज भी वक्त के सामने रूठ जाता हूँ मेरा अतीत मुझे ही दोहरा है ज़माने के पीछे मुझे ही बुलाता है रातों की चाँदनी मुझे ही दिखाता … Read more

मौसम आज श्रावण बनकर आयेगा

*कविता* श्रावण बनकर आयेगा मौसम को बुलायेगा बादल आज रंग लायेगा अम्बर से नीर आज बरसेगा धरती को आज नहलायेगा नीर का बादल आज आयेगा मौसम का संगीत लेकर जायेगा इन्द्रधनुष को साथ लेकर आयेगा सुखी भूमि का आज प्यास बुझायेगा आज सुहानी रात लेकर आयेगा आज चकमते बादल क… Read more

मैं ही कुदरत हूँ

*कविता*मैं ही कुदरत हूँ मैं ही बादल का घाना छाया हूँ मैं ही रातों का घाना अँधेरा हूँ मैं ही उगते सूरज का किरण हूँ मैं ही ढलते दिन का प्रकाश हूँ मैं ही चाँदनी रातों का सितारा हूँ मैं ही अम्बर का बरसता बादल हूँ मैं ही निरंतर लहरों का ब्रह्मांड हूँ मैं ही इस … Read more

डगर में वन है

*कविता* डगर में वन है डगर वाली रात थी नगर वाली बात थी वनों की कतार थी आहत की उतार थी मध्यरात्रि की शुरूआत थी तारे चमकने की राज़ थी खतरों की आवाज़ थी आहट की अंधेरी रात थी सनसानाहट की गुनगुनाहट थी दिल में बेचैनी की घबराहट थी आहटों में किसी बुलाहट थी राह… Read more

सर्वसशक्ता नारायणी

*कविता* नारी तुम ही नारायणी हो जग की तुम ही वाहिनी हो स्वर्ग की तुम ही दाहिनी हो शृंगार में तुम ही मानिनी हो नारी अब तुम नारायणी बनेगी जीवन में अब महाकाली बनेगी काली जैसा महारुप दिखायेगी नारी शक्ति की पहचान बनायेगी नारी की शक्ति तुम जागाओ नारायणी बनकर त… Read more

रुको मत,छोड़ो मत

*कविता* कदम आगे तो बढ़ाओ कही ठहरों मत जाओ जिंदगी ऐसी बनाओ तुम किसी आगे झुक मत जाओ बनाओ तुम जिंदगी को इकरार चाहोगें तुम जिंदगी का बेकरार सब छोड़ देगें तुम्हारे इरादे को खुद ही ढूँढेगें अपनी फ़रियादे को रुक मत जाना कभी छोड़ मत देना कभी भूल मत जाना कभी इ… Read more

शहर से दूर, जाना जरुर

*कविता* चले हम कुदरत की आवाज़ सुनने चले हम कुदरत की आज़ादी देखने चलता हूँ पंक्षियों की उड़ान देखने चला हूँ, कुदरत की पहचान देखने चाहत की  जिंदगी में ख़्वाब को जानना है जिंदगी की संदेश में कुदरत को पहचानना है हर फैसले में अपनी ही चाहत को पुकारना है जीवन की … Read more

आज जीनें दो

*कविता*आज रहने दो आज रहने दो आज जीनो दो बादलो का अँधेरा कब-तक रहेगा? अँधेरों का चिराग कभी तो बुझेगा ज़िंदगी का राज़ कभी तो खुलेगा इंसानियत के आगे कभी तो झुकेगा अँधेरे में भी रोशनी की तलाश करेंगे जिंदगी में रहकर यादों की बरसात बनेगें समय को जिंदगी से लड़न… Read more

असफलता ने दी मुक़ाम

*कविता* हौंसले की किरण को कैद करके रख लूँ ख्वाबों की नींद को अपनी जिंदगी बना लूँ सच होते है सपने अपनी जिंदगी को बता दूँ हर हौसले को उम्मीद की किरण बना दूँ सूरज तपकर भी मौसम बना देती है मानव भी मेहनत करके स्वेद बना देती है उम्मीद की एक नयी किरण बना देती है … Read more

ज़िंदगी की डगर

*कविता* तन्हाई की डगर में यूँ ही खोये रहते है कुछ पाने के इन्तजार यूँ ही खोये रहते है ज़माने की नगर में यूँ ही सोये रहते है समय की सागर में यूँ ही डूबें रहते है उम्मीदों की नज़र में यूँ ही खोये रहते है मानव की ज़हर से यूँ ही रोये रहते है बिखर कर कुछ पाना चा… Read more

ज़मानत पर है,संसार

*कविता* पास में भी दूरियाँ नज़र आती है भीड़ में भी तन्हाई नज़र आती है हँसी में भी कष्ट छिपाई जाती है जिंदगी भी यही कहलाई जाती है दूर रहकर पास कौन? बुलाता है भूल जाने पर याद कौन? करता है तन्हाई की राज़ कौन ?रखता है ज़माने की बात कौन? करता है ज़माना तेजी स… Read more

ज़हर बनी ज़िंदगी

*कविता* मैंने इंसान को करीब से देखा आँसू की धारा नजदीक से देखा दर्द को सीने में छिपाकर घुमते देखा जिंदगी ज़हर है ऐसा कहते हुए देखा जिंदगी ना जीने की कोई वजह होगा ना खुश होने के लिए कोई वजह होगा पलभर की खुशियों का बहार ना देखा होगा दिल का दर्द सीने में चुभ… Read more

गुड्डी हवा में उड़ रही थी

*कविता* पतंग को उड़ाते हुए देखा बचपन की तरफ मुड़कर देखा उड़ते पतंगों का डोरा टूट जाता है लहरते हुए हवाओं में कही खो जाता है वक्त के आसमान में कही सो जाता है ना जाने कहाँ?,बचपन की यादें रह जाता है बचपन की यादों को देख लेता हूँ पतंग को भागते हुए लूट लेता हू… Read more

चित्र भी विचित्र है

*कविता* चित्र कुछ बयान करता है दिल भी कुछ ध्यान लगाता है दिन कुछ अवमान कहता है प्रेम भी कुछ फ़रियाद रखता है क्षितिज भी कुछ बुनियाद रखता है जिन्दगी में कुछ लोग नालायक कहते है समय के साथ चलने में लोग लायक कहते है इतिहास लिखने वालो को नायक कहते है संघर्ष की … Read more

वक्त ही संसार है,वक्त ही प्यार है

*कविता* हँस -हँस कर बोल देते हो झुठ आसानी से बोल देते हो सच को आसानी से भूला देते हो लोगों को ऐसे ही गुमराह कर देते हो लोगों की पहचान यूँ ही नही होती इतिहास यूँ ही नही लिखी  जाती मेहनत की मैदान यूँ ही नही छोड़ी जाती खुद को त्याग कर यूँ ही नही जोड़ी जाती … Read more

सुहाना ये सफ़र है,वक्त ये पुराना है

*कविता* सफ़र ये सुहाना है वक्त ये पुराना है जिंदगी की सूरज यूँ ही ढल रही है वक्त की जिंदगी यूँ ही छल रही है चेहरे की जिंदगी यूँ ही पड़ रही है वक्त की द्वार यूँ ही छिपे जा रही है ज़माने के लोग यूँ ही डर रहे है समय से पहले यूँ ही मर रहे है तन्हाई में लोग य… Read more

दिक्कत में ही हिम्मत है

*कविता* दिक्कत में शहनाई बजा लो हिम्मत की कलाई बना लो उम्मीद की ऊँचाई दिखा दो तन्हाई में शहनाई बजा दो किस्मत की दवाई बना लो कलम की सियाही दिखा दो ख़्वाब का तारा दिखा दो किस्मत हमारा दिखा दो किस्मत को लड़ाई बना लो पीड़ा को तन्हाई बना लो प्रेरणा का स्त्र… Read more

संसार के आँचल में

*कविता* रात में ही संसार है संसार में ही रात है असल जिंदगी से डरता हूँ रातों की नींद में ही मरता हूँ वक्त के आँचल में सोता हूँ ये जहान में ही रोता हूँ अलग संसार में ही रहता हूँ किस्मत के पिंजरे में ही सोता हूँ वक्त के आँचल में  ही रोता हूँ तन्हाई के पल … Read more

माथे पर हाथ है

*कविता* माथे पर हाथ रखता हूँ ह्रदय में प्यार रखता हूँ समय पर राज़ रखता हूँ ह्रदय में एक बात रखता हूँ वक्त से पहले इम्तिहान रखता हूँ ख्वाहिश की रात  देखता हूँ बीते यादों को याद करता हूँ संघर्ष की पहचान रखता हूँ जन्मभूमि को याद करता हूँ प्रेम की खोज करता … Read more

भारत को बना दिया, राजनीतिक ने दलदल

*कविता* वोट माँग लेते हो,सिर झुका कर सड़क पर आ जाते हो,सिर उठा कर जीत जाते हो,ख़्वाब दिखा कर भूल जाते हो,सिर छिपा कर छिप जाते हो,आँख दिखा कर बोल जाते हो,उम्मीद दिखा कर सही को गलत बना देते है भाषण देकर फुसला लेते है जनता को लुटकर चले जाते है फिर वापस नही … Read more

अनंत शक्ति के आगे झुकता हूँ ,मैं

*कविता* जीते-जी  ये सफलता मुझे दिखा देना लोगों की भीड़ में मेरी पहचान बना देना कविता मेरी लोगों को दिखा देना मर भी जाऊँ तो ये दुनिया को बता देना सूरज  की किरणों में ये उम्मीद दिखा देना आराम में नही,संघर्ष में जीना चाहता हूँ,मैं मर के भी , भविष्य में जीना चा… Read more

क्या? लिखूँ,क्या? करुँ

*कविता* खाली मन अब विराना हुआ तन्हाई दिल अब रवाना हुआ रातों की नींद अब दीवाना हुआ ये शहर अब परवाना हुआ ये जिंदगी अब डरावना हुआ संसार अब मुझे दर्पण में दिखा इंसान अब मुझे अर्पण में दिखा ये नाग मुझे फण में दिखा ये रक्त मुझे रण में दिखा समय कुछ ना कुछ दिखा… Read more

जाऊँ तो जाऊँ कहाँ?

*कविता* जाऊँ तो जाऊँ कहाँ? सफ़र कभी खत्म नही होती जिंदगी में कभी गम नही होती सोचता हूँ,कही दूर चला जाऊँ ज़िंदगी में कही लापता सा हो जाऊँ अकेली राह का प्रीत बन जाऊँ अँधेरी रात का रीत बन जाऊँ जंगलों का शीत बन  जाऊँ जीवन का गीत बन जाऊँ अतीत का नीत बन जाऊँ … Read more

गाँव से हवा चली,सुकून दे गयी

*कविता* गाँव से हवा चली शहर में जाकर दवा बनी जिंदगी में आकर साँस बनी दिल में जाकर जान बनी ये हवा परदेशियों की याद बनी गाँव की याद में,बचपन की एहसास बनी पेड़ों की छाँव में, सुकून भरी रात बनी गाँव की यादों में, ये हवा मेरी जान बनी ये हवायें कुछ लेकर आती है… Read more

ज़िंदगी आज रुला रही है

*कविता* आज जिंदगी रुला रही है वक्त आज सुला रही है समय से पहले मुझे बता रही है किसी यादों में आज रो गया हूँ जिंदगी की पीड़ा में खो गया हूँ आँख की रोशनी कही छिप रही है जीवन के अंधेरे में कही दिख नही रही है ख्वाबों की रात कही मिट रही है साहस भरा दिल कही टूट … Read more

वसंत पंचमी का आना

*कविता* वसंत का आना ऋतुएँ का ठहर जाना सरसों का खिलना मंजर का हिलना मौसम का खुलना पत्तों का झुलना पवन का चलना सूरज का दिखना फसलों का खिलना सुहाने मौसम का होना दिल का बसना सूरज का चमकना नये पत्ते का खिलना आसमानों का झुलना बादल का हटना ओस  का चमकना … Read more