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दिक्कत में ही हिम्मत है

*कविता*

दिक्कत में शहनाई बजा लो
हिम्मत की कलाई बना लो
उम्मीद की ऊँचाई दिखा दो
तन्हाई में शहनाई बजा दो
किस्मत की दवाई बना लो
कलम की सियाही दिखा दो

ख़्वाब का तारा दिखा दो
किस्मत हमारा दिखा दो

किस्मत को लड़ाई बना लो
पीड़ा को तन्हाई बना लो
प्रेरणा का स्त्रोत बता दो
हाथों की रेखा सजा दो

वक्त की मार से मत मरों
हाथों की लकीरों से मत डरो
पीड़ित होकर भी दर्द सहो
दर्द में भी हमदर्द सहो

संघर्ष बनकर तुम चलो
इतिहास बनने तुम चलो
काँटों का दर्द तुम सहो
फुल बनकर तुम गुजरों

लहरों का सामना हम करेगें
समुन्दर का प्यार हम जीतेगें
करुणा जाल हम  बिनेगें
पवन बनकर हम उड़ेगें

रचयिता:रामअवध

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