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वक्त ही संसार है,वक्त ही प्यार है

*कविता*

हँस -हँस कर बोल देते हो
झुठ आसानी से बोल देते हो
सच को आसानी से भूला देते हो
लोगों को ऐसे ही गुमराह कर देते हो

लोगों की पहचान यूँ ही नही होती
इतिहास यूँ ही नही लिखी  जाती
मेहनत की मैदान यूँ ही नही छोड़ी जाती
खुद को त्याग कर यूँ ही नही जोड़ी जाती

हर वक्त को लगा कर यूँ ही नही छोड़ी जाती
जिंदगी को छोड़ यूँ ही नही मोड़ी जाती
तन्हाई की रात यूँ ही नही छोड़ी जाती
ईश्वर के चरणों में माथा यूँ ही नही झुक जाती

मन यूँ ही वीराना है
दिल यूँ ही सितारा है
वक्त यूँ ही पुराना
घर यूँ ही वीराना है

ये वक्त को छोड़ दो
दिर को मोड़ दो
तन्हाई को रोक दो
भाग्य को जागा दो

रचयिता:रामअवध



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