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चित्र भी विचित्र है

चित्र कुछ बयान करता है
दिल भी कुछ ध्यान लगाता है
दिन कुछ अवमान कहता है
प्रेम भी कुछ फ़रियाद रखता है
क्षितिज भी कुछ बुनियाद रखता है

जिन्दगी में कुछ लोग नालायक कहते है
समय के साथ चलने में लोग लायक कहते है
इतिहास लिखने वालो को नायक कहते है
संघर्ष की चोट में लोग कायक कहते है

किस देश की कला है ये
नयी उम्मीद की पहचान है ये
नयी किरण की जान है ये
यही वक्त की पहचान है ये

सच में, ज़िंदगी भी मौत सी नजर आती है
छल में,जिंदगी भी खोट सी नजर आती है
ज़माने में, भागदड़ की नोट नजर आती है
हर वक्त में, इंसानियत भी भूखा नजर आती है

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