ज़मानत पर है,संसार

*कविता*

पास में भी दूरियाँ नज़र आती है
भीड़ में भी तन्हाई नज़र आती है
हँसी में भी कष्ट छिपाई जाती है
जिंदगी भी यही कहलाई जाती है

दूर रहकर पास कौन? बुलाता है
भूल जाने पर याद कौन? करता है
तन्हाई की राज़ कौन ?रखता है
ज़माने की बात कौन? करता है

ज़माना तेजी से चलती जा रही है
मेरा वक्त कही रुकती जा रही है
ज़माने के पीछे छिपी जा रही है
जिंदगी के नीचे ढली जा रही है
वक्त मुड़ने का नाम नही ले रही है
जिंदगी रुकने का नाम नही ले रही है

 कौन? सा शंका चला है इस ज़माने में
जो घर टूट जाता है इस ज़मानत में
लगे रहते है लोग इस अमानत में
दिल छोड़ देते है अपनी ज़मानत में

चलो इंसानो की पहचान करने
चलो जिंदगी की एहसास देखने
चलो जिंदगी की इकरार करने
चलो दिल का बहार देखने

रचयिता:रामअवध


1 Comments

Mr Manish said…
आप तो बहुत ही बढ़िया लिखते है