असफलता ने दी मुक़ाम

*कविता*

हौंसले की किरण को कैद करके रख लूँ
ख्वाबों की नींद को अपनी जिंदगी बना लूँ
सच होते है सपने अपनी जिंदगी को बता दूँ
हर हौसले को उम्मीद की किरण बना दूँ

सूरज तपकर भी मौसम बना देती है
मानव भी मेहनत करके स्वेद बना देती है
उम्मीद की एक नयी किरण बना देती है
आँखो के सपने सच करके दिखा देती है

हिम्मत को हराने असफलता आती है
कई बार निराशा देकर चली जाती है
टिक ना पाती,हिम्मत की आग के आगे
छोड़ जाती है,सफलता की राग के आगे

असफलता भी समझ जाती है
मंज़िल पर दाग नही लगा पाती है
हर बार हार का निराशा ले जाती है
लगन की शक्ति को समझ जाती है

पहचान लेती है नर की ताकत को
समझ जाती है हिम्मत की आग को
घुमाव देती है अपने ही सुझाव को
पहचान लेती है मानव की ताकत को


रचयिता:रामअवध

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