future

आज रहने दो, आज ही जीनो दो

*कविता*

बादलो का अँधेरा कब-तक रहेगा?
अँधेरों का चिराग कभी तो बुझेगा
ज़िंदगी का राज़ कभी तो खुलेगा
इंसानियत के आगे कभी तो झुकेगा

अँधेरे में भी रोशनी की तलाश करेंगे
जिंदगी में भी रोशनी की तलाश करेंगे
समय को जिंदगी से लड़ने ना देगें
हम जिंदगी की चाहत को खोने ना देगें

चाहत की माँग भी हम ही रखेगें
समय के साथ हमेशा ही रहेंगे
संसार में कुछ करके ही जायेंगे
नाम नही,कुछ देकर ही जायेंगे

हम आज भी अकेले रो लेते है
जिंदगी में कभी-कभी खो जाते है
सबके सामने आज भी झुक जाते है
परेशानियों में जिंदगी आज भी खो देते है

एक ज़माना आयेगा,जिसमें पुकार सुनाई देगा
सुनहरा मौका आयेगा,जिसमें बेक़रार सुनाई देगा

नयी उम्मीद लायेगें
नया सवेरा जागायेगें
वक्त को उठायेगें
जिंदगी हम बनायेगें
अपना वक्त लाकर दिखाये

रचयिता:रामअवध

Post a Comment

0 Comments