ज़िंदगी आज रुला रही है

*कविता*

आज जिंदगी रुला रही है
वक्त आज सुला रही है
समय से पहले मुझे बता रही है
किसी यादों में आज रो गया हूँ
जिंदगी की पीड़ा में खो गया हूँ

आँख की रोशनी कही छिप रही है
जीवन के अंधेरे में कही दिख नही रही है
ख्वाबों की रात कही मिट रही है
साहस भरा दिल कही टूट रही है

रोशनी में अंधेरा भी छाया है
वक्त में रक्त भी पाया है
दिल में दर्द भी रखा हूँ
साँसो में वक्त भी रखा हूँ

जिंदगी की सीख में तन्हाई पाया हूँ
ये वक्त की मार में ,कसाई पाया हूँ
खुद के मेहनत से,पढा़ई पाया हूँ
वक्त की मार से, कमाई पाया हूँ

पर ये ज़माना सभी को छोड़ देता है
वक्त आने पर सभी को जोड़ देता है

कविता आज छिपी सी लग रही है
जिन्दगी आज रूठी सी लग रही है
नज़र आज झुकी सी लग रही है
ये ज़माना आज झुठी सी लग रही है

रचयिता:रामअवध

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