शहर से दूर, जाना जरुर

*कविता*

चले हम कुदरत की आवाज़ सुनने
चले हम कुदरत की आज़ादी देखने
चलता हूँ पंक्षियों की उड़ान देखने
चला हूँ, कुदरत की पहचान देखने

चाहत की  जिंदगी में ख़्वाब को जानना है
जिंदगी की संदेश में कुदरत को पहचानना है
हर फैसले में अपनी ही चाहत को पुकारना है
जीवन की संघर्ष में ही अपनी जिंदगी को सजाना  है

खुले आकाश में,खुला ख़्वाब दिखाना है
हर कोई जाने ऐसा करके कुछ बताना है
संसार के सामने,अपना सफलता दिखाना है
हर कोई समझ सके,करके कुछ दिखाना है

शहरों से अच्छी यही जिंदगी है
हर पल से शांति भरी जिंदगी है

पवन की लहरें,धरती को छूकर निकल जाती है
मेहनत की फसल, पवन से मिलकर चली जाती है

अब हम चलते है,देहांत की ओर मुड़ते है
शहर से भागते है,गाँव की ओर चलते है
दिल कही छोड़कर,यादों मेंकही बसते है?
कविता लिखने के लिए कविता को चाहते है

रचयिता:रामअवध



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