रुको मत,छोड़ो मत

*कविता*

कदम आगे तो बढ़ाओ
कही ठहरों मत जाओ
जिंदगी ऐसी बनाओ तुम
किसी आगे झुक मत जाओ

बनाओ तुम जिंदगी को इकरार
चाहोगें तुम जिंदगी का बेकरार
सब छोड़ देगें तुम्हारे इरादे को
खुद ही ढूँढेगें अपनी फ़रियादे को

रुक मत जाना कभी
छोड़ मत देना कभी
भूल मत जाना कभी
इरादे को रखना कभी

दिल की बात रखना कभी
दुनिया के आगे सुनना कभी
साहस की बात करना कभी
जिंदगी के बारे बताना कभी

दर्द का मार भी उम्मीद जागाता है
जिंदगी सहने का साहस बताता है
विपत्ति को मारने का समाधन दिखाता है
दर्द का मार सह ले,उसके हिम्मत दिलाता है

मत रुको, मत बैठो
मत छोड़ो,मत ठहरों

रचयिता:रामअवध


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