future

मैं चला जाता हूँ

*कविता* मैं चला जाता हूँ

मैं आज भी अतीत में चला जाता हूँ
वही की यादों में ठहर कर रह जाता हूँ
रोज सुबह सूरज के चरणों झुक जाता हूँ
मैं आज भी वक्त के सामने रूठ जाता हूँ

मेरा अतीत मुझे ही दोहरा है
ज़माने के पीछे मुझे ही बुलाता है
रातों की चाँदनी मुझे ही दिखाता हैं
काल के पीछे मुझे ही घूमाता है

पल-पल की यादों को दोहराता हूँ
ज़िंदगी के पल को हमेशा लहराता हूँ
जीवन के बीते पल को बुलाता हूँ
छोड़कर कही नही जाना चाहता हूँ
किस्मत को जोड़ने में चला जाता हूँ

बीते यादों में खुशियों की लहर है
पीछे की यादों में जीवन की ठहर है
उस ज़माने में ठहरे हुए शोहरत है
बड़प्पन की ज़िंदगी मे मोहलत है

बातों से नही ,हाथों से लिखूँगा
समय से पहले इतिहास बनाऊँगा
लिखकर भी इतिहास जागाऊँगा
जागकर भी इम्तिहान बनाऊँगा

रचयिता:रामअवध





Post a Comment

0 Comments