क्या है? मन की रेखा

*कविता*

सच की रेखा कभी नही दिखती है
मनुज के आगे कभी नही झुकती है
वक्त के सामने कभी नही रुकती है
सच्चाई की बात कभी नही दिखती है

मनुष्य ढूँढता है ,सच्चाई की बात
संसार सोचा है ,अच्छाई की रात
कुदरत बोलता है ,ईश्वर की आदत
लोग समझते है ,कुदरत की लागत
सही समझते है ,उसी की कयामत

अनदेखी सी नज़र आयी है मेरी आँखों में
अनदेखी सी नज़र आयी है मेरी बातों में
चाहत की नज़रे आयी है मेरी ज़िंदगी में
बादलों का झोंका आया है मेरे वक्त में
दिखा ना पाया सच्चाई को,मैं अपनी आँखों में

खुद से ज्यादा कौन? जानता है मुझको
भाव की भाषा कौन? समझता है मुझको
सच्चाई की राज़ कौन? बोलता है मुझसे
आँखों की प्यार कौन? जोड़ता है मुझसे

चाँदनी की रातों पे, चाहत रखा बातों पे
तन्हाई की आदत पे, राहत रख दी कविता पे

चाँदनी सी रात आयी
सच्चाई की बात आयी
ज़िंदगी की राज़ आयी
 ख्वाहिश की रात बुलायी

रचयिता:रामअवध

0 Comments