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कौन? जीवन का तैराक है

*कविता*

तैरने चला हूँ,जिंदगी के समुन्दर से
लड़ने चला हूँ,जिंदगी के जंजीर से
तौलने चला हूँ,समय के दायरे से
छोड़ने चला हूँ,किस्मत के कायरे से

जिंदगी की गहराई कोई नाप नही पाता
हर कोई गहराई की बात जान नही पाता
जिंदगी अनमोल है हर कोई समझ नही पाता
बचने के लिए कोई ज़माने के पीछे चला जाता

समय का साथ दो
हर वक्त उसको हाथ दो
जिंदगी की बरसात दो
ज़िंदगी की उड़ान दो
खुद को दबाकर मत रखो
चाहत की बात रखो
साहस की परिभाषा बनो
दूसरे को साहस दो

खुशियों की पुकार लो
वक्त के साथ इम्तिहान लो
समय से पहले उड़ान लो
ज़िंदगी में इम्तिहान लो

कोई डूबकर निकल जाता है
कोई डूबकर विकल जाता है
कोई रहकर दाखिल हो जाता है
कोई समझकर निकल जाता है

रचयिता:रामअवध

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