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दंगे क्यों? देश हम सबका है

*कविता*

दंगे क्यों?

दंगे की भीड़ में बेकसूर मारे गये
पत्थरों से उनका रक्त बहाये गये
लहू में बेकसूर बेचारे चिल्लाये गये
उन पर पत्थर बाज़ करवाये गये

हिंसा को रोकेगें,देश को बचायेगें
देश अपना है,अपनों को बुलायेगें
रुधिर को हटायेगें,देश को जागायेगें
स्वयं को लगायेगें,देश के काम आयेगें

अपनों का रक्त क्यों?बहाते हो
देश में दंगे क्यों? करवाते हो
बेकसूर को क्यों?मरवाते हो
देश का नुक्सान क्यो? करवाते हो

लोगों ने अपने देश को ही जला दिये
खुद को पहचाने में वक्त गुजार दिये
देश को जलाने में,देश के खिलाफ आ गये
देश हम सबका है,हम सबको भी जला गये

देखों,देश में हिंसा फैलाने वालों को
समझओ हिंसा पीछे भागने वालों को
देश के खिलाफ लड़ने वालो को रोको
देश में हिंसा फैलाने वालो को रोको

मेरा भारत अमर रहे
देश हमेशा पावन रहे

रचयिता:रामअवध

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