गाँव से हवा चली,सुकून दे गयी

*कविता*

गाँव से हवा चली
शहर में जाकर दवा बनी
जिंदगी में आकर साँस बनी
दिल में जाकर जान बनी

ये हवा परदेशियों की याद बनी
गाँव की याद में,बचपन की एहसास बनी
पेड़ों की छाँव में, सुकून भरी रात बनी
गाँव की यादों में, ये हवा मेरी जान बनी

ये हवायें कुछ लेकर आती है
ज़िंदगी की सुकून दे जाती है
मुड़कर दोबारा कह जाती है
फिर घूमकर आ जाती है
सपना हमें दिखा जाती हैं

मन शांत करके चली जाती है
उड़ते हवाओ में सुगंध ले आती है
जिंदगी भर कर प्यार मुझे दिखा जाती है
जींव-जन्तु में साँस बनकर चली जाती है

भूमंडल पर नारा बनकर लहर जाती है
दरिंदों की उड़ान भरकर चली जाती है
सबकी यादे देकर चली जाती है
जिंदगी भर साथ देकर चली जाती है

मुझसे भी कुछ कही थी
यादों बस गयी थी
दिल में रह गयी थी
संदेश लेकर आयी थी

रचयिता:रामअवध


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