जाऊँ तो जाऊँ कहाँ?

*कविता* जाऊँ तो जाऊँ कहाँ?

सफ़र कभी खत्म नही होती
जिंदगी में कभी गम नही होती

सोचता हूँ,कही दूर चला जाऊँ
ज़िंदगी में कही लापता सा हो जाऊँ
अकेली राह का प्रीत बन जाऊँ
अँधेरी रात का रीत बन जाऊँ

जंगलों का शीत बन  जाऊँ
जीवन का गीत बन जाऊँ
अतीत का नीत बन जाऊँ
यादों का प्रीत बन जाऊँ

चलो दूरियाँ बनकर,रह जाते है
हिम्मत बाँधकर बस जाते है
दूर रहकर भी जी सकते  है
खुद का पैगाम भी दे सकते है

अकेला रहना एकदम ठीक है
कुदरत को जानना एकदम नीक है
खुशियों को पालना एकदम ठीक है
ज़िंदगी जीना एकदम सीख है

दिल को माना नही पाता हूँ
उसकी बात रख नही पाता हूँ
खुशियाँ को दे नही सकता हूँ
दिल में बसा नही सकता हूँ

रचयिता:रामअवध


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