अनंत शक्ति के आगे झुकता हूँ ,मैं

*कविता*

जीते-जी  ये सफलता मुझे दिखा देना
लोगों की भीड़ में मेरी पहचान बना देना
कविता मेरी लोगों को दिखा देना
मर भी जाऊँ तो ये दुनिया को बता देना
सूरज  की किरणों में ये उम्मीद दिखा देना

आराम में नही,संघर्ष में जीना चाहता हूँ,मैं
मर के भी , भविष्य में जीना चाहता हूँ,मैं
जग में,कुछ लिखकर भाग्य को पीना चाहता हूँ,मैं
मर के भी,दिलों के भाव में जीना चाहता हूँ,मैं

माना में आज कुछ कर नही सकता
लोगों के आगे आज झुक नही सकता
वक्त से में कुछ पूछ नही सकता
सबकी बुद्धि में बदल नही सकता

सोचकर भी कुछ कर नही सकता
तमन्ना को कभी मिटा नही सकता
खुद का ख़्वाब कभी चुरा नही सकता
ईश्वर को कभी बुला नही सकता
कलयुग को कभी मिटा नही सकता

लालच में कभी लाभ नही होता
खुशी की कोई बात नही होता
जिंदगी में ऐसी कोई रात नही होता
हर वक्त मेरे साथ कोई ओर नही होता

रचयिता:रामअवध

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थैंक थैंक थैंक धन्यवाद