future

भारत को बना दिया, राजनीतिक ने दलदल

*कविता*

वोट माँग लेते हो,सिर झुका कर
सड़क पर आ जाते हो,सिर उठा कर
जीत जाते हो,ख़्वाब दिखा कर
भूल जाते हो,सिर छिपा कर
छिप जाते हो,आँख दिखा कर
बोल जाते हो,उम्मीद दिखा कर

सही को गलत बना देते है
भाषण देकर फुसला लेते है
जनता को लुटकर चले जाते है
फिर वापस नही आ पाते हो
खूब मौज उड़ा लेते हो
दिन ऐसा दिखा जाते हो

वोट माँगने सड़क पर आ जाते हो
यही इंसानियत लोगो दिखा जाते हो
घर-घर जाकर हाथों को जोड़ लेते हो
चुनाव के बाद कही तो खो जाते हो
जीतकर भी ये वादें ये भूल जाते हो
वर्षों-तक कही तो छिप जाते हो
उम्मीद की लहर बरसा कर चले जाते हो
फिर वापिस कही ना दिख पाते हो

वोट दो वोट दो
कहकर  नही ठक जाते हो
झुठी गवाह देकर जनता को लुट जाते हो
जय हिन्द, पुकार कर चले जाते हो

चुनाव के बाद कही ना दिख पाते हो
समय से पहले कही ना रुक पाते हो
आराम की जड़ तुम पकड़ पाते हो
समय से पहले तुम जाग नही पाते हो

रचयिता:रामअवध

Post a Comment

1 Comments

क्या बात है बोहोत अच्छे .