माथे पर हाथ है

*कविता*

माथे पर हाथ रखता हूँ
ह्रदय में प्यार रखता हूँ
समय पर राज़ रखता हूँ
ह्रदय में एक बात रखता हूँ
वक्त से पहले इम्तिहान रखता हूँ

ख्वाहिश की रात  देखता हूँ
बीते यादों को याद करता हूँ
संघर्ष की पहचान रखता हूँ
जन्मभूमि को याद करता हूँ

प्रेम की खोज करता हूँ
सुकून की रात ढूँढता हूँ
खुशियों की जहान खोजता हूँ
यादों की बात दोहराता हूँ

हवा के साथ साँस रखता हूँ
जिंदगी पर प्रहार देखता हूँ
थोड़ी यादों की बरसात रखता हूँ
उसकी पलकों याद रखता हूँ

रचयिता:रामअवध



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