सर्वसशक्ता नारायणी

*कविता*

नारी तुम ही नारायणी हो
जग की तुम ही वाहिनी हो
स्वर्ग की तुम ही दाहिनी हो
शृंगार में तुम ही मानिनी हो

नारी अब तुम नारायणी बनेगी
जीवन में अब महाकाली बनेगी
काली जैसा महारुप दिखायेगी
नारी शक्ति की पहचान बनायेगी

नारी की शक्ति तुम जागाओ
नारायणी बनकर तुम दिखाओ
विकराल काल तुम दिखाओ
नारी शक्ति तुम जागाओ

संसार में जग जननी का स्वरूप दिखाओ
मानव को जागाकर अपना रुप दिखाओ

नारी शक्ति अब तुम्हें बनना होगा
नारायणी रुप अब तुम्हें दिखाना होगा
चलते कदम कही रुक ना जाये
नारी शक्ति को कोई भूल ना जाये

नारायणी तुम ही जग की न्यारी हो
नारायणी तुम ही ईश्वर की प्यारी हो
इस ब्राह्मण की तुम ही रक्षा दाहिनी हो
कुदरत की माया में तुम ही विलीन हो

रचयिता:रामअवध


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