Showing posts from March, 2020Show all

अविचल हूँ,मैं

*कविता*अविचल हूँ,मैं ख़ौफ़ नही है मुझमें तिमिर की छाया में तृष्णा नही है मुझमें दुनिया की माया में दुर्भिक्ष के पल में भू-गगन कहर गये बीहड़ की छाया में ये मानव समा गये जिंदगी के मंशा मे ये साँस बता गये पवन की डगर में ये राहत दिखा गये कब-तक ख़ौफ़ में… Read more

करे तो करे क्या?

*कविता*करे तो करे क्या? करे तो करे क्या? खाली मन में भरे क्या? बैठे-बैठे मन डूब गया दिन ये आज रुठ गया बैठे है कुदरत के पल में सोच रहे है अपने हाल में देख रहे है अपने काल में उत्तर खोज रहे है सवाल में देख रहे है जिंदगी की जवाब में देख ये जिंदगी का पथ कैस… Read more

आनंद विहार में काफी संख्या लोग क्यों पहुँच रहे है ?

मजदूरों की वास्तविकता* काफी मजदूरों को फैक्ट्री मालिक जाने को कह रहे है, तथा उन्हें भागाया भी जा रहा है और भोजन की भी समस्या है रोज कमाने मजदूर भी है,ऐसा पूरे देश में हो रहा है,पटरी सहारे कई किलोमीटर दूर पैदल चल रहे है मजदूर बेसहारा हो गये,मजदूर पूछने पर पता च… Read more

बंजर है ये क्षण

*कविता*बंजर है ये क्षण नयनों से बूँदे गिरने लगी दुख की लहर आने लगी ह्रदय में बजर गिरने लगी हिम्मत की बात  टूटने लगी चट्टान से बड़ा खतरा आने लगी जिंदगी अब बंजर होने लगी दिन में अँधेरा छाने लगी ह्रदय की चाहत मिटने लगी रब  की ख़्वाब हटने लगी मौत की लहर छान… Read more

कोरोना ने विभाजन कर दिया,मानव का

*कविता*कोरोना ने विभाजन कर दिया,मानव का अब इंसानियत को जागा देना पैदल चले लोगों को खाना खिला देना भूखे पेट किसी को सुला मत देना मृत्यु के आगे झुका मत देना इंसानियत को पीछे हटा मत लेना कोई गरीब भूखा मर ना जाये भूखों को खाना खिला कर जाये इंसानियत अपनी बना कर… Read more

चंचल दिल आज शांत है

*कविता*चंचल दिल शांत है धीरे-धीरे बूँदों का टपकना शहर में पैरों का लपकना ज़िंदगी में रातों का ढल जाना सुबह के पल यूँ ही गुजर जाना ख्वाबों की रात को ढूँढकर आना ज़हर वाली बाते सुनकर आना अम्बर से बरसा बादल गरजा नही ज़िंदगी का क्षणभर कही गुजरा नही अम्बर से बर… Read more

कई अरबों लोगों को चीन ने संकट में डाल दिया

कोरोना का ज़हर,संसार में कहर कोरोना वायरस से बचने लिए ईश्वर को पुकार रहे है,लोग तथा अपने घर से बाहर नही निकल रहे है लोग,चीन के लोग जीव-जंतु को खाना नही छोड़ रहे है,चीन से आये वायरस को विश्वभर के लोग कहर रहे है चीन की सरकार को जीव-जन्तु को खाने पर रोक लगा देना चाह… Read more

प्रलय ला दी वायरस

*कविता*प्रलय ला दी वायरस प्रलय की चादर छायी बचने की आशा आयी संसार में सन्नाटा छायी बचने की आशा आयी छिप जाते है कुटिया में लहर जाते है दुखिया में संभल जाते है दुनिया में संभव आते है देहिया में गिर जाते है दुनिया में संसार सन्नाटे में आ गयी है इस बीमारी … Read more

प्राकृतिक को मत गँवाना

*कविता*प्राकृतिक को मत गँवाना इंसान की सोच-विचार अपने कदमों में है ज़िंदगी की लिखी कलम अपने हाथों में है वक्त ना गँवाना,जिन्दगी तुम्हारी यादों में है बीते पल को मत भूलना,तुम्हारी जिंदगी में है चीर कर कुदरत को वक्त दिखा दो हिरण की तरह अपनी चाल दिखा दो जीवन क… Read more

चीन में फिर से फैला वायरस,कोरोना के बाद हंटा वायरस आया

*हंटा वायरस* चीन में एक ऐसा मरीज पाया गया  है जिसमें नया वायरस का पहचान करा दी,जिसका नाम है हंटा वायरस कहा जाता है कि इस वायरस का उत्पत्ति चूहे के खाने से हुआ है पहले ही कोरोना वायरस से काफी लोग मारे जा चूके है,चीन की लापरवाही से फिर से समस्त संसार में खतरा पैदा क… Read more

कोरोना से मजाक नही,सरकार का सहयोग दे

*कोरोना से मजाक नही* *सही विचार,सही योगदान दो सरकार को* समस्त संसार के नागरिक कोरोना वायरस से बचाव के लिए सरकार के नियमों का पालन कर रही है,जिसे वायरस से बचा जा सके,सरकार ने भी कोरोना वायरस पर ध्यान में रखते हुए,कठिन नियम लागू कर दिये ताकि इस वायरस का ज्यादा … Read more

मेहरिया ख्वाबों की परछाई में आयी

*कविता*मेहरिया ख्वाबों की परछाई में आयी मन की परछाई में एक चेहरा छायी ख्वाबों की रात में शहनाईयाँ आयी ना दिखने वाली एक मेहरिया आयी ज़िंदगी में खुशियों की लहरिया छायी ज़िंदगी में उसके लिए एक पेहरा छायी तड़पा देती है,उसके पल में ऐसी नजरिया पायी गिरा देती है,म… Read more

दूर है मेरा घर

*कविता*दूर है मेरा घर खूब दूर जाना है,घर के नजदीक आना है इरादा खूब है,समय के नजदीक जाना है ख्वाबों में तसवीर बनकर आती है जिंदगी में नसीब बनकर जाती है दूर होकर ऐसी चाहत बना जाती है प्रेम की जिंदगी हमे सीखा जाती है सफ़र इतना दूर है हम जा नही सकते घर इतना पा… Read more

नर कोरोना से बच रहा है,जग कोरोना रणभूमि में लड़ रहा है

*कविता*नर कोरोना से बच रहा है,जग कोरोना रणभूमि में लड़ रहा है* हम सब देश की बात मानेगें कोरोना को जड़ से हटायेगें विपत्ति से मुक्त होकर दिखायेगे कोरोना से दूर रहकर दिखायेगें सभी को इसका सुझाव बतायेगें संकट का दिन ला दिया ये कोरोना बनकर आ गया ये तेजी से फैल… Read more

संवाददाता बना यंत्र

कविता*संवाददाता बना यंत्र क्षणभर में संवाद जाने लगा पलभर में संवाद आने लगा यंत्रों पर वार्तालाप आने लगा पत्रों का ज़माना अब जाने लगा यंत्रों पर सारा सुविधा आने लगा दूरियाँ भी अब मिटाने लगा संवाद अब यंत्रों पर आने लगा सोशल मिडिया पर आने लगा कागज पर लिखा प… Read more

जिंदगी का रण

*कविता*ज़िंदगी का रण ज़िंदगी का रण होगा जिंदगी के संग होगा नींद को त्याग कर इतिहास बना दूँगा चाहत को रख कर हिम्मत बना दूँगा कब?-तक इतिहास मुझसे दूर जायेगा कभी तो मेरे करीब से गुजर आयेगा वर्षों की छाया मुझ पर कब? छायेगा इतिहास मेरा कब? बनकर आयेगा मेरे स… Read more

वैश्विक कोरोना वायरस पर रोकथाम

वैश्विक कोरोना रोकना है संपूर्ण मानव जाति पर इसका व्यापाक प्रभाव पड़ रहा है सभी देश कोरोना वायरस को रोकने के लिए नये कदम उठा रहे है जल्द से जल्द कोरोना वायरस को रोका जा सके,आप लोगों से निवेदन करता हूँ कोरोना वायरस को हल्के ना ले इस महामारी से बचाने का उपाय ढूँढे … Read more

गुरु,माँ-बाप

*कविता* गुरु,माँ-बाप गुरु बिना कोई मार्ग नही संघर्ष बिना कोई ज्ञान नही बिना कोशिश की कोई राह नही राह बिना ज़िंदगी में कोई बात नही माँ बिना कोई जान नही बाप बिना कोई राहत नही भविष्य की राह हमें दिखाते है स्वयं का अनुभव हमें सीखाते है ज्ञान की रेखा हमें बता… Read more

दशरथ मांसी

*कविता* दशरथ मांसी लगा चिरने पहाड़ों का बसेरा बना दिया इतिहास का डगैरा तोड़ दिया किस्मत का अँधेरा मोड़ दिया सपनों का सवेरा छोड़ दिया ख्वाबों का नगैरा खून से बना इतिहास का पथ रख दिया अपने माथे पर नथ उठा लिया अपने हाथों पर रथ किस्मत को बुला दिया अपने पथ म… Read more

नर कभी नारी का रुप लेना

*कविता* तुम क्या? जाने नारी क्या? है नारी बिना हम सब क्या? है नारी बिना हम सब कहाँ होगें? माँ के बिना हम सब कही रोयेगें माँ के बिना हम सब कही खोयेगें नारी बिना हम सब कैसे रहेगें? माँ ना हो तो हम सब कैसे जीयेगें? नारायणी रुप कैसे देख पाओगें नारी बिना संसा… Read more

कोरोना वायरस

*कविता* *Coronavirus Poem in hindi* लू की शुरुआत होयेगी कारोना की विनाश होयेगी डरने की कोई बात नही होगी भयभीत भरी कोई रात नही होगी हिम्मत सबका बाँध कर रखना है धैर्य सबका संभाल कर रखना है कोरोना अपने-आप भाग जायेगा भयभीत मन सबका टूट जायेगा घबराये जा रहे… Read more

पब्जी कविता

*कविता* *पब्जी खेल है,पब्जी मनोरंजन* सौ जनो का संग है ये रणभूमि का रण है ये खेल भूमि का जन है ये जन-जन में पब्जी नाम है ये यंत्रों का मनोरंजन खेल है ये हवा की लहर से नीचे आयेंग भागकर घर में गन उठायेगें पब्जी में बन्दूक हम चलायेगें खेल हम ऐसा खेलकर दिख… Read more

बनारस कवियों की पहचान

*कविता* बनारस कवियों की पहचान बनारस खड़ा है सदियों से इतिहास बता रहा है सदियों से बहती गंगा का रुप दिखाई देता है कवियों का स्वरुप दिखाई देता है साहित्य का इतिहास सुनाई देता है कवियों का कविता गवाई देता है परिंदो का उड़ान,गंगा के निकट चलती धारा में स्वर्ग … Read more

क्षण भर की याद

*कविता* क्षण भर की याद धीरे-धीरे यादें मिटने लगी बीते पल थे,अब जाने लगी किसी की यादों अब सताने लगी दिल की बातें अब आने लगी ज़िंदगी के साथ अब जाने लगी यादों के साथ अब आने लगी दिल मेरा अब चुराने लगी प्यार का दर्पण मुझे दिखाने लगी दुखी के पल अब रुकने लगी … Read more

क्यों तोड़ दी ज़िंदगी?

*कविता* क्यों तोड़ दी जिंदगी? क्यो? डरते हो अंधकार से क्यों? लड़ते हो भगवान से क्यो? कहते हो जिंदगी से क्यों? सहते अपनी मर्ज़ी से क्यों? करते हो बेईमानी से क्यों? रखते हो अंहकार को क्यों? सहते हो अहंकारी को क्यों? मरते हो अंधकारी को क्यों? हँसते हो किस्… Read more

होली में झूमना

*कविता* जहाँ रहना है,वहाँ धूम तो मचायेगे रंगो में रंगीन होकर झूम तो जायेंगे प्यार की नगरी में लहर तो हम उठायेगे खुशियों की बारात तो लेकर हम लायेगें रंगों में रंगीन होकर आयेगें हम खुशियों को लेकर आयेगें हम प्यार की बरसात बरसायेगें हम साहस की नगरी दौड़ायेगें… Read more

रंगों की ओढ़नी छाया है

*कविता* रंगो की ओढ़नी छायी है मेरे दिल पर रंगीन होकर आयी है मेरे दिल पर सुहाने मौसम का रंग आया है मेरे हाथों पर दिल के दरवाज़े खुले है मेरी अरमानों पर साँस भी बादलो में घुमता है दिल भी आसमानों में झुमता है रंगो की लहर आज कुछ कह रही थी किस्मत के पीछे रंगीन… Read more

अम्बर की शाम

*कविता* अम्बर की शाम अम्बर की शाम है ज़िंदगी की धाम है लोगों को आराम है ज़िंदगी को सलाम है अम्बर में शाम कहाँ ढलता है? ज़िंदगी में रात कहाँ गुजरता है? बादल के कदम कभी रुकती नही चलते हुए कदम कही दिखती नही गगन की लहर कभी झुकती नही आसमान पर कही ठिकती … Read more

वंचक में संकट

*कविता* संकट में वंकट दिखता है जिंदगी में वंचक लिखता है छोड़कर चला जायेगा दुनिया तुम्हें याद करेगी लिखी हुई जावानी तुम्हें शायद लौटा देगी तुम्हारी कहानी तुम्हें याद दिलवा देगी तुम्हारी कविता तुम्हें ज्ञान पाकर आ जायेंगे हम ध्यान लाकर चले जायेंगे हम सज्ञा… Read more

शाम दिखा अम्बर में

*कविता* शाम दिखा अम्बर में पल कही रुठ गया दिन कही खो गया शाम कही सो गया दिल कही रो गया शाम दिखा अम्बर में दिन खिला आँचल में रात दिखा चादर में आँख खुला बादल में चाँद दिखा आँचल में ख्वाहिश की रात आयी है दिल में उसकी बात छायी है खुशी पर उसकी चाहत आयी है … Read more

कुछ करुँगा

*कविता* निराशा से भरी मेरी जिंदगी थी ख़्वाब से भरी मेरी कहानी थी आँखों से भरी मेरी जिंदगी थी यादों से भरी मेरी जवानी थी अंहकार का तोड़ तो आयेगा तेरा दर्पण तुझे ही दिखायेगा समय का मार सह ना पायेगा बीते अतीत को भूल ना पायेगा मेरी जिंदगी तुझे ऐसी मोड़ पर ले… Read more

मैं हूँ,या नही हूँ

*कविता*मैं हूँ,या नही हूँ कौन? अब मेरा दिल बहलायेगा कौन? मेरे साथ अब रह पायेगा तेरी यादों में कोई ना सज पायेगा दिल ऐसे ही तड़प कर मर जायेगा कौन?मेरी यादों को तेरी यादों में जोड़ पायेगा जिंदगी की राह,अब कौन? मुझे दिख लायेगा कभी तो वह पल लौटकर आयेगा मेरे जि… Read more

हाथों की चिह्न गलत है

*कविता* हाथों की चिह्न गलत है जिंदगी के सामने सच है बेचैनी वाली एक मुलाक़ात होती है ज़माने के पीछे एक बात होती है इन्तजार वाली एक चाहत होती है राहत वाली एक बरसात होती ढूँढते पल में,कितने मुलाक़ात होती है खुशी के पल ढूँढने की जरुरत नही किसी के पल पर रहने … Read more

शांत बैठा दिल,प्यार करने चला

*कविता* दिन गहरी सोच डूबूँगा तुम्हारी यादो में प्यार की लिख दूँगा तुम्हारी सारी बातों में उसी दिन लिख दूँगा प्यारी वाली बातों में हर पर याद रखूँगा,तुम्हारी पलको की मुस्कान में चाहत की तमन्ना तुम्हारे ही ख़्वाब में रखूँगा पलकों की चाहत तुम्हारे ही इकरार में र… Read more

हिंसा के पीछे दानव है

*कविता* मानव अब दानव बना है हिंसा के पीछे पागल बना है भारत माँ का आज रक्त बहा है आँचल में माँ का खून दहा है नयनों में आज माँ नूर बहा है दिल में आज माँ का खून दहा है हिंसा के चपेट में बेकसूर मरे देश की रक्षा में नौजवान जले भारत के नाम पर ये वीर जले शहीदो… Read more

ज़माना दुखी से हारी है

*कविता* छोटी सी ज़िंदगी को हँसाने की कोशिश करता हूँ आशा की किरण को जागाने की कोशिश करता हूँ मन में बेचैनी है,शांत करने की कोशिश करता हूँ छल की दुनिया से,कही दूर रहने का विचार रखता हूँ मेरी जिंदगी शुरुआत,तन्हाई में ही गुजर गयी ज़माने के पीछे चलते-चलते कदम ही … Read more