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रंगों की ओढ़नी छाया है

*कविता*

रंगो की ओढ़नी छायी है मेरे दिल पर
रंगीन होकर आयी है मेरे दिल पर
सुहाने मौसम का रंग आया है मेरे हाथों पर
दिल के दरवाज़े खुले है मेरी अरमानों पर

साँस भी बादलो में घुमता है
दिल भी आसमानों में झुमता है

रंगो की लहर आज कुछ कह रही थी
किस्मत के पीछे रंगीन बातें डूब रही थी
साहस से भरी रात टूट रही थी
किस्मत के पीछे ज़माना रुठ रही थी

आज सुनहरा मौसम आया है
दिल में रंगीन बात छाया है
होश मैंने आज गबाया है
साहस की नींद मैंने उड़ाया है

चेहरा भी आज रंगीन है
दिल भी आज संगीन है

नयी किरणों में रंगीन बादल आया है
रंगो में रंगीन सुनहरा चादर छाया है
हरेक पल में रंगीन बादल आया है
साहस की सवेरा आज जागाया है

रचयिता:रामअवध





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