क्षण भर की याद


*कविता* क्षण भर की याद

धीरे-धीरे यादें मिटने लगी
बीते पल थे,अब जाने लगी
किसी की यादों अब सताने लगी
दिल की बातें अब आने लगी

ज़िंदगी के साथ अब जाने लगी
यादों के साथ अब आने लगी
दिल मेरा अब चुराने लगी
प्यार का दर्पण मुझे दिखाने लगी

दुखी के पल अब रुकने लगी
खुब किये बात अब झुकने लगी
बातों पर अब  हँसने लगी
ख्वाबों पर प्यार जताने लगी
ज़िंदगी मेरे साथ गुजारने लगी

देखो आज सब कुछ बदल गया
भाग्य नीचे सब कुछ ढल गया

बढ़ते जा रहे है दृश्य का विकराल
ढलते जा रहे है बचपन का काल
ज़िंदगी उतर गये यंत्रों की दुकान में
क्षण को ढूँढते है यादों की जान में

भूल गये है,मंत्रों का जाप
छूट गये है यादों का छाप

रचयिता:रामअवध

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