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बनारस कवियों की पहचान

*कविता* बनारस कवियों की पहचान

बनारस खड़ा है सदियों से
इतिहास बता रहा है सदियों से

बहती गंगा का रुप दिखाई देता है
कवियों का स्वरुप दिखाई देता है
साहित्य का इतिहास सुनाई देता है
कवियों का कविता गवाई देता है

परिंदो का उड़ान,गंगा के निकट
चलती धारा में स्वर्ग का विकट
शाम की आग आरती के नाम
 जिंदगी के पल कुदरत के नाम

आते है लाखों की कतार में
जाते है लोगो की बहाव में
चाहत रखो, बनारस जाने में
राहत रखो, बनारस आने में

सदियों पुराना बनारस देखते है
हर सुबह सुनहरा पल मिलते है
नदियों किनारा बनारस गुंजते है
बनारस में गंगे माँ का नारा बोलते है

शामों में मंदिरों की घंटी सुनाई देती है
सुबह में माँ गंगे की लहर दिखाई देती है
रंगीन पंक्षियों की कतार दिखाई देती है
रात्रि में बनारस की चाहत दिखाई देती है

रचयिता:रामअवध


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